आदर्श आचार संहिता के तहत चेकिंग की आड़ में पुलिस, प्रशासनिक टीमों द्वारा 50 हजार या उससे ज्यादा नकदी लेकर जाने वाले कारोबारियों और आम लोगों को पकड़े जाने से नाराज उद्यमियों और व्यापारियों ने कलक्ट्रेट में जमकर हंगामा किया। डीएम राम गणेश मतदाता जागरूकता रैली से निपटकर दोपहर करीब 12 बजे कलक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय में पहुंचे तो कई व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य उनके कार्यालय में घुस गए। पहले तो कुछ देर तक व्यापारियों ने अपने उत्पीड़न का मामला रखा और चुनाव आयोग द्वारा गैर राजनीतिक लोगों से 50 हजार से ज्यादा की नकदी मिलने पर जब्त करने एवं विधिक कार्रवाई संबंधी जारी आदेश की प्रति दिखाने की मांग की। इसका डीएम, वरिष्ठ कोषाधिकारी और एडीएम (प्रशासन) कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर कारोबारी अड़ गए और चुनाव आयोग का पत्र दिखाने की मांग करते हुए कुर्सियों को पीछे धकियाकर डीएम को चारों ओर से घेरकर बैठ गए। डीएम करीब डेढ़ घंटे तक व्यापारियों के घेरे में रहे। इस दौरान कलक्ट्रेट में अफरातफरी का माहौल रहा।
डीएम के घेराव की खबर मिलने पर करीब एक बजे एसपी केबी सिंह वहां पहुंचे। उन्होंने व्यापारियों को उत्पीड़न संबंधी सभी मामले दिखवाने की बात कहकर कारोबारियों को शांत कराया। चुनाव आयोग से सिर्फ राजनीतिक दलों, उनके प्रतिनिधियों, समर्थकों या कार्यकर्ताओं के चुनावी मद में ही एकमुश्त रकम ले जाते हुए पकड़े जाने पर कार्रवाई किए जाने संबंधी बिंदु वाला पत्रक दिखने पर एसपी ने उसे ही दो घंटे में प्रभावी कराए जाने का आश्वासन दिए जाने पर व्यापारियों का गुस्सा शांत हुआ। तब कहीं डीएम चुनाव आयोग की वीडियो कांफ्रेंसिंग में शामिल होने के लिए जा सके। बता दें कि बैंकों समेत व्यावसायिक फर्मों को ले जाई जाने वाली सीमित धनराशि की धरपकड़ रोके जाने की मांग को लेकर उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट, आदर्श व्यापार मंडल, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार मंडल आदि संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में व्यापारियों के साथ सोमवार दोपहर कलक्ट्रेट पहुंच गए। मिश्रा गुट के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ ने इस मुद्दे पर बात करने के लिए डीएम राम गणेश से समय ले रखा था, लेकिन डीएम उस वक्त मतदाता जागरूकता रैली में व्यस्त थे। इस पर विभिन्न संगठनों ने नारेबाजी के साथ कलक्ट्रेट में प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी बीच, आचार संहिता से जुड़े उत्पीड़न की पीड़ा लेकर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल भी कई उद्यमियों के साथ वहां पहुंच गए। डीएम के निर्देश पर निर्वाचन व्यय निगरानी प्रभारी बनाए गए वरिष्ठ कोषाधिकारी ने आचार संहिता के तमाम पन्ने पलट डाले, लेकिन व्यावसायिक उद्देश्य की रकम सीज करने का कोई प्रावधान दर्ज नहीं मिला। इस पर व्यापारियों के सुर और तीखे हो गए। आईआईए के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल भी चुप नहीं रहे। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले बरेली में एक विवाह समारोह से लौट रहीं उनकी पत्नी की कार बंथरा के पास पुलिस ने रोककर मिठाई के डिब्बे, फलों की टोकरी, सूटकेस आदि खुलवाकर तलाशी ली और काफी देर तक गाड़ी को रोके रखा। व्यापारी नेता नाजिम खां ने सवाल किया कि अब तक कितने विधायकोें और संभावित उम्मीदवारों की गाड़ियां चेक की गईं। अफसरों से कोई उत्तर नहीं मिला तो उद्यमियों समेत व्यापारी नेता कुर्सियां छोड़ डीएम के दफ्तर में ही फर्श पर धरने पर बैठ गए। डीएम ने जवाबदेही के लिए एसपी केबी सिंह को अपने कार्यालय बुलवाया। देर तक चली वार्ता के बाद अफसरों ने व्यापारियों को व्यावसायिक रकम की जब्ती पर रोक लगाने को निर्वाचन आयोग से बात करने का आश्वासन दिया।
घेराव-प्रदर्शन में ये रहे शामिल
उद्यमी रामचंद्र सिंघल, राधारमण अग्रवाल, व्यापारी नेता पंकज वर्मा सराफ, रमेशचंद्र शुक्ला, किशोर गुप्ता, अनुज गुप्ता, सतीश वर्मा सराफ, अनवार खां, सुनील गुप्ता, नीरज गुप्ता, राजा रस्तोगी, अभिजीत द्विवेदी, शकील अहमद, जितेंद्र नाथ शुक्ला, ललित खुराना, संजय सेठी, सगीर अहमद, देवेश गुप्ता, अजय मोहन शुक्ला, ओमबाबू सराफ, कमल किशोर वर्मा, ज्ञानजी रस्तोगी, सिद्धार्थ गोयल, संजय सेठी, पीके गुप्ता, रमेश शर्मा, वेद प्रकाश रावत, बाल कृष्ण रस्तोगी, रमाकांत वर्मा आदि।