शाहजहांपुर। डालमिया ग्रुप की निगोही मिल को छोड़कर शेष चारों मिलें किसानों को खरीदे गए गन्ना का संपूर्ण भुगतान अभी तक नहीं कर सकी हैं। बमुश्किल 25 फीसदी भुगतान कर देनदारी चुकता करने में सबसे पीछे रही बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल को गत सप्ताह चेतावनी देने पर भी उसने बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान में दिलचस्पी नही दिखाई। डीएम उमेश प्रताप सिंह ने मिल प्रबंधन को नोटिस देकर राजस्व विभाग से आरसी (वसूली प्रमाणपत्र) जारी कराने की चेतावनी दी है।
गत 26 अप्रैल को डीएम ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर चीनी मिल वार गन्ना बकाया भुगतान की समीक्षा की थी। तब तक निगोही मिल गन्ना किसानों को शत-प्रतिशत बकाया भुगतान कर चुकी थी। बैठक में डीएम ने अन्य चारों मिलों के अधिकारियों को एक सप्ताह में गन्ना का संपूर्ण भुगतान एक सप्ताह में करने के निर्देश देते हुए चेताया था कि ऐसा नहीं होने पर संबंधित मिलों के खिलाफ राजस्व विभाग से आरसी जारी करा दी जाएंगी। इसके बावजूद मिलों की भुगतान की स्थित लचर बनी रही।
रोजा चीनी मिल के यूनिट हेड मुनेश पाल ने बताया था कि 235.90 करोड़ रुपये गन्ना देयता के सापेक्ष 212.09 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और शेष 23.80 करोड़ रुपये का भुगतान 15 मई तक कर दिया जाएगा। हालांकि, इस बीच रोजा मिल प्रबंधन ने 12 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य किसानों को भेज दिया, लेकिन मिल पर अभी 11 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है और प्रबंधन ने इसके भुगतान को 30 मई तक का समय मांगा है।
तिलहर सहकारी मिल के प्रधान प्रबंधक ने एक सप्ताह में सात करोड़ रुपये भुगतान करने और शेष रकम बाद में चुकाने का वायदा तो किया, लेकिन उस पर अमल नहीं किया। इसी तरह पुवायां सहकारी चीनी मिल प्रबंधन ने 38.85 करोड़ रुपये अवशेष गन्ना मूल्य का भुगतान शासन से धनराशि मिलने पर करने का वायदा किया।
समीक्षा बैठक में डीएम ने मकसूदापुर चीनी मिल के कम भुगतान पर संबंधित अधिकारियों को आड़े हाथों लिया क्योंकि यह मिल 202 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना पेरने के बावजूद किसानों को सिर्फ 53 करोड़ रुपये दे सकी। डीएम ने जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव को एक सप्ताह में भुगतान की स्थिति नहीं सुधरने पर वसूली प्रमाण पत्र के लिए गन्ना आयुक्त को पत्र भेजने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद मिल प्रबंधन ने गन्ना बकाया चुकता करने को कोई प्रयास नहीं किए तो डीएम ने मिल के अध्यासी को गन्ना पूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 की धारा 17/4 के तहत नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस के अनुसार एक सप्ताह में भुगतान नहीं होने पर मिल के खिलाफ आरसी जारी कराई जाएगी।