पुवायां (शाहजहांपुर)। बंडा इलाके के रामपुर हीरा गांव निवासी बुजुर्ग हरिश्चंद्र की हत्या उनके बेटे विनोद ने की थी। उसने खुद को बचाने के लिए हत्या की रिपोर्ट अपने तहेरे भाइयों के खिलाफ लिखा दी थी। पुलिस ने घटना का खुलासा कर मृतक के हत्यारोपी बेटे को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
बंडा थाना के ग्राम रामपुर हीरा निवासी 60 वर्षीय हरिश्चंद्र 12 अगस्त को खेत पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। अगले दिन गन्ने के खेत में उनका शव पड़ा मिला था। हरिश्चंद्र की गला काटकर हत्या कर दी गई थी। उनके बेटे विनोद कुमार ने हत्या का आरोप लगाते हुए अपने तहेरे भाइयों हरद्वारी और वीरपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। घटना के पीछे तहेरे भाइयों ने जमीन का विवाद बताया था।
बंडा पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान पता चला कि हरिश्चंद्र पिछले कुछ दिनों से घर के पास बने एक गुरुद्वारे में खाना खाते थे। हरिश्चंद्र अपनी जमीन दान में गुरुद्वारे के नाम करने की बात कहते थे। इसी बात को लेकर उनका पुत्र विनोद कुमार नाराज रहता था। जमीन दान करने की बात को लेकर हरिश्चंद्र और उनके बेटे विनोद के बीच विवाद भी होता रहता था। शक के आधार पर पुलिस ने विनोद को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामला खुलता चला गया।
पुलिस के मुताबिक पिता के नाम की जमीन हाथ से जाने के डर से विनोद ने पिता हरिश्चंद्र को ठिकाने लगाने का मन बना लिया। मौका मिलते ही विनोद ने 12 अगस्त को चाकू से पिता का गला रेत दिया। हत्या करने के बाद शव को अपने तहेरे भाई हरद्वारी के गन्ने के खेत में डाल दिया। खुद को बचाने के लिए तहेरे भाइयों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने शनिवार को विनोद को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात भी कबूल कर ली। विनोद की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया गया है। शनिवार को कोर्ट के आदेश पर विनोद को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
विनोद की चप्पलों के निशानों से खुला राज
पुवायां। पुलिस के मुताबिक घटना स्थल पर हरिश्चंद्र की लाश के पास चप्पलों के निशान मिले थे। छानबीन के दौरान डॉग स्क्वायड शव के पास सूंघने के बाद सीधे विनोद के घर पहुंचा था। उधर, विनोद दस वर्ष पूर्व के जमीनी विवाद में तहेरे भाइयों पर अपने पिता की हत्या का आरोप लगा रहा था। जबकि गांव के लोगों से पता चला कि हरिश्चंद्र की अपने भतीजों से ऐसी कोई रंजिश नहीं है। विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि हरिश्चंद्र के खेत पर जाने के कुछ ही देर बाद विनोद भी पीछे से गया था, जो देर शाम तक घर नहीं लौटा था। इस पर पुलिस ने विनोद की चप्पलों की जांच की। जांच में हरिश्चंद्र के शव के पास मिले निशान विनोद की चप्पलों मिल गए। इसके बाद पुलिस ने विनोद से पूछताछ की तो वह टूट गया और हत्या की बात कबूल कर ली।
योजना के तहत बहाने से पिता को खेत पर भेजा था
पूछताछ के दौरान विनोद ने पुलिस को बताया कि हरिश्चंद्र अक्सर कहते थे कि वह आधी जमीन गुरुद्वारे के नाम कर देंगे। यह वह नहीं चाहता था। पिता नहीं माने तो उसने हत्या का प्लान बनाया। उसने 12 अगस्त को खेत देखने के बहाने पिता को घर से भेजा था। पीछे से वह भी चाकू लेकर खेत पर पहुंच गया। उसने चाकू से पिता की गर्दन पर कई प्रहार किए, जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई। अंधेरा होने पर घर चला गया। अगले दिन तलाश करने के बहाने वह मौके पर गया और हत्या किए जाने का शोर मचा दिया।
हरिश्चंद्र की हत्या के बाद पुलिस गंभीरता से जांच में जुटी थी। हत्या में दो लोग नामजद किए गए थे, लेकिन साक्ष्य कुछ और ही कहानी कह रहे थे। विनोद कुमार के परिवार के सभी सदस्यों से बयान लिए गए और गांव वालों से भी पूछताछ की गई। विनोद के घरवालों के बयान अलग-अलग थे। इससे भी शक बढ़ गया। पुलिस ने गहनता से पूछताछ की तो विनोद ने अपने पिता हत्या का आरोप कबूल कर लिया।