अप्रैल 2007 में दहेज की खातिर विवाहिता को जिंदा जलाकर मार डाला गया था। इस मामले में सास-ससुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान दोनों आरोपियों को दोषी पाया गया। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
शाहजहांपुर में अपर सत्र न्यायाधीश/ फास्ट ट्रैक कोर्ट कृष्णलीला यादव ने विवाहिता की हत्या के मामले में सास और ससुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सास और ससुर ने बेटा न पैदा होने और दहेज की मांग पूरी न होने पर बहू को जला दिया था। कोर्ट ने सोमवार को दोनों दोषियों को सजा सुनाई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी सुमित अवस्थी ने आरसी मिशन थाने में तहरीर दी थी कि उनकी बहन रचना मिश्रा का विवाह अप्रैल 2007 में मोहल्ला रेती के रहने वाले सुमित मिश्रा से हुआ था। शादी में लगभग चार लाख रुपये नकद दिए थे। चार लाख रुपये और खर्च हुए थे। इसके बावजूद ससुराल के लोग बहन को दहेज के लिए मानसिक तौर पर परेशान करते थे। इस संबंध में बहन ने मायकेवालों को भी बताया था।
पुत्र पैदा न होने पर देते थे ताना
मायकेवालों ने कई बार समझौता करा दिया। इसके बाद बहन ने दो बेटियों को जन्म दिया। बहन की सास वीना मिश्रा और ससुर विमल मिश्रा बेटियां होने और दहेज में रुपये न देने का ताना मारकर परेशान करने लगे। पुत्र न होने के चलते परेशान करते थे। 24 दिसंबर 2017 की रात आठ बजे उसके बहनोई ने फोन पर बताया कि उसकी बहन बीमार है। वह बहन की ससुराल पहुंचे तो मालूम हुआ कि वह जिला अस्पताल में है।
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जिला अस्पताल में ज्ञात हुआ कि उसकी बहन की मौत हो चुकी है। आरोप लगाया कि सास वीना मिश्रा और ससुर विमल मिश्रा ने बहन की जलाकर हत्या कर दी थी। पति पर आरोप नहीं लगाए गए थे। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद विवेचना की। सास और ससुर के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान दोनों लोगों को दोषी पाया गया। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।