शाहजहांपुर। निगोही कस्बा और आसपास के गांवों में बंदरों का आतंक है। पिछले पांच दिन में 104 लोगों को बंदर काट चुके हैं। सीएचसी पर घायल सभी लोगों ने एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाई है।
बंदरों की वजह से नगर में लोगों ने कवर्ड घर बनवा लिए हैं। छतों पर बंदरों के कब्जे से लोग सुबह गुनगुनी धूप का आनंद भी नहीं ले पा रहे हैं। छतों पर सूख रहे कपड़े भी बंदर उठा ले जाते हैं। भगाने पर ये हमलावर हो जाते हैं। गत माह मोहल्ला नई बस्ती निवासी कल्लू खां पर छत पर मौजूद बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। इसी मोहल्ले की हमीदा को भी बंदरों के झुंड ने काट लिया था। बंदर रोजाना लगभग 18 लोगों को निशाना बना रहे हैं।
सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन चौधरी ने बताया कि एक दिसंबर को 30, दो दिसंबर को 27, तीन व चार दिसंबर को 14-14 और पांच दिसंबर को 19 लोगों को बंदरों के हमले में घायल होने पर एआरवी लगाई गई। इसके अलावा कई लोगों ने घरेलू उपचार भी किया।
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इन गांवों के लोग भी परेशान
-कस्बे के परा झरसा, कुंदिरना, उदारा, उदारिया, संडा खास, कजरी नूरपुर, अरेली, इस्माइलपुर, ढकिया तिवारी, कबीरपुर, पलिया, गुरगवां, बिरासिन, गढ़ा, मदारीपुर, पिपरिया खुशहाली, जहानपुर आदि गांवों के लोग भी बंदरों के उत्पात से परेशान हैं।
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बंदरों के पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग की नहीं है। मथुरा की एक निजी संस्था नगर निकाय के आदेश पर बंदरों को पकड़कर वन विभाग के सुपुर्द करती है। इस संस्था के लोग तभी आते हैं, जब बंदरों को पकड़ने के लिए उन्हें आदेश मिलते हैं।
-घनश्याम शुक्ला, रेंजर (तिलहर वन प्रभाग)
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नगर पंचायत में ऐसा कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है, जिसके जरिए बंदर पकड़े जा सकें। इस काम को कराने के लिए प्रशासन को आगे आना होगा। इसके लिए डीएम से पत्राचार कर सहयोग मांगा जाएगा।
-मनोज वर्मा, चेयरमैन, नगर पंचायत निगोही