पुवायां (शाहजहांपुर)। कोरोना की वजह से देश में लॉकडाउन लगा तो दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर तमाम मुसीबतें उठाकर अपने घर लौटे थे। कोई सैकड़ों किलोमीटर पैदल चला तो किसी को भूखे रहकर सफर करना पड़ा। कोरोना का संक्रमण अभी कम भी नहीं हुआ लेकिन प्रवासी श्रमिक फिर दूसरों राज्यों को काम करने जाने लगे। पुवायां और ददरौल इलाके श्रमिक पंजाब और हरियाणा जाना शुरू कर दिए हैं। इनका कहना है कि यहां रोजगार न मिलने के चलते भूखे मरने की नौबत आ गई है। श्रमिकों को लेने के लिए ठेकेदार अपनी गाड़ियां भी भेज रहे हैं।
कोरोना संक्रमण फैलने पर केंद्र सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर दिया था। इससे तमाम कारखाने आदि बंद हो जाने से श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। बस, ट्रेन और निजी वाहनों की सेवा बंद हो जाने से श्रमिक काम करने वाले दूसरे प्रदेशों में ही फंस गए थे। बाद में श्रमिक बमुश्किल सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई बसों और श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से घरों तक पहुंच सके थे। तमाम श्रमिक पैदल और साइकिलों आदि से कई-कई दिन तक चल कर घर पहुंच सके थे। घर पहुंचे श्रमिकों का कहना था कि वह लोग अब गांव में ही काम करेंगे और दूसरे प्रदेशों में काम करने नहीं जाएंगे। वर्तमान समय में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पंजाब और हरियाणा में धान की रोपाई शुरू हो गई है। श्रमिक नहीं मिलने के कारण रोपाई का काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है, इस कारण वहां के बड़े फार्मरों ने पुवायां क्षेत्र में डेरा जमा लिया है। कुछ कारखानों के मैनेजर भी क्षेत्र में आकर श्रमिकों को काम पर वापस चलने की मनुहार कर रहे हैं। इसके लिए ज्यादा मजदूरी और ले जाने, वापस आने के लिए वाहन भी मुहैया कराए जा रहे हैं। तमाम श्रमिक पंजाब और हरियाणा रवाना भी हो गए हैं। खुटार के गांव चमराबोझी से श्रमिक पंजाब गए हैं। कई अन्य गांवों से भी श्रमिकों को दूसरे प्रदेशों में जाना जारी है।
बंडा के गांव मूड़ा मझिगई निवासी शिवकुमार ने बताया कि उनके गांव के 10 लोग हरियाणा में काम करके 15 मई को घर वापस आए थे। पुवायां में क्वारंटीन के समय राशन मिला था। इसके बाद कोई सुविधा नहीं मिली। जॉब कार्ड होने के बाद भी मनरेगा में काम नहीं मिल रहा था। मजबूर होकर पांच जून को उनके गांव के 12 लोग पंजाब काम करने चले गए हैं। इस गांवसभा की प्रधान अर्चना देवी के पति धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में मनरेगा के तहत काम कराया गया था। पंजाब से आए श्रमिकों ने मनरेगा में काम करना नहीं चाहा, जबकि दूसरी ग्राम पंचायत के लोग मनरेगा में काम करने आए थे।
गांव पंचायत बसंतापुर के प्रधान संजीव पटेल ने बताया कि उनकी गांवसभा से पांच जून को लगभग 50 लोग पंजाब और हरियाणा गए हैं। ग्राम पंचायत विक्रमपुर के प्रधान रामवीर ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत से भी कुछ लोग पंजाब, हरियाणा गए हैं।
धान की रोपाई पांच हजार रुपये एकड़
पुवायां। पंजाब गए श्रमिकों के परिवार के लोगों ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में धान की रोपाई पांच हजार रुपये प्रति एकड़ है। पुवायां क्षेत्र में धान की रोपाई का ठेका प्रति एकड़ दो से ढाई हजार रुपये होता है। इस प्रकार पंजाब, हरियाणा में रोजाना चार से पांच सौ रुपये मजदूरी पड़ जाती है। जबकि गांव में प्रतिदिन दो सौ रुपये मजदूरी मिलती है।
प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा के तहत काम दिया गया है। सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा का तेजी से चल रहा है। यदि श्रमिकों को कोई समस्या आ रही है तो प्रशासन को अवगत कराएं, समाधान कराया जाएगा।
- दशरथ कुमार, एसडीएम पुवायां
ददरौल से मजदूर पंजाब गए
ददरौल। विकासखंड ददरौल क्षेत्र के गांव मोहद्दीपुर के सतीश, बिजेंदर, जितेंद्र, ईसपाल, अजयवीर, राजकुमार, राजीव, राममोह, रितु समेत 10 प्रवासी मजदूर बृहस्पतिवार को पंजाब के लिए रवाना हुए। उन्हें लेने के लिए पंजाब के ठेकेदार ने अपनी गाड़ी भेजी थी। इन मजदूरों को कहना है कि मनरेगा में 250 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मजदूरी मिलती है, जिससे उनके परिवार का खर्चा नहीं चल पाता है। पंजाब में उन्हें 450 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलती हैं। दरअसल, पंजाब में साठा धान की रोपाई शुरू हो चुकी है। प्रवासी मजदूरों के चले आने से धान की रोपाई कराने में दिक्कत हो रही है। इसी कारण पंजाब के ठेकेदार अपनी गाड़ियां भेजकर मजदूरों को बुला रहे हैं।