शाहजहांपुर। चौक कोतवाली क्षेत्र के कच्चा कटरा निवासी अखिलेश गुप्ता ने पत्नी रेशु गुप्ता और दो बच्चों के साथ सात जून को सूदखोर से तंग होकर फंदे से लटककर जान दे दी थी। घटना को छह महीने बीतने के बाद भी परिजन की एक भी मांग सरकार और प्रशासन ने पूरी नहीं की। अखिलेश की मां ने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में एक पत्र देकर मांगें पूरी करने की गुहार भी की थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। परिवार सूदखोर द्वारा जबरन कराए गए मकान के बैनामे को रद्द करने समेत अन्य मांगों को लेकर अब तक भटक रहा है।
दवा व्यापारी अखिलेश गुप्ता ने कारोबार के लिए कांट थाना क्षेत्र के रहने वाले सूदखोर अविनाश वाजपेयी से ब्याज पर 12 लाख रुपये लिए थे। अखिलेश ब्याज भी चुकाता रहा और असल भी देता रहा, लेकिन सूदखोर चक्रवर्ती ब्याज लगाकर उसके ऊपर करीब 70 लाख और देने का दबाव बनाने लगा। इसके बाद सूदखोर अविनाश ने यह कहकर अखिलेश के मकान का बैनामा अपने नाम करा लिया कि रुपये अदा होने के बाद वह उसके मकान का बैनामा पलट देगा। इस दौरान ब्याज के नाम पर लाखों रुपये ऐंठने के बाद सूदखोर अखिलेश से मकान खाली करने की मांग करने लगा। इतना ही नहीं, अखिलेश को ही उसके मकान का किरायेदार बनाकर प्रतिमाह की किराये की रसीद भी देने लगा।
सात जून की सुबह सूदखोर ने अखिलेश को फोन पर एक घंटे के अंदर मकान खाली करने का फरमान सुना दिया। फोन कटने के कुछ देर बाद ही अखिलेश उसकी पत्नी रेशू ने दो बच्चों के साथ मकान के अंदर अलग-अलग जगहों पर फंदे से लटककर जान दे दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बरेली के फरीदपुर के रहने वाले अखिलेश के पिता अशोक गुप्ता हो जानकारी दी। पुलिस को वहां से एक डायरी मिली और तीन सुसाइड नोट मिले।
घटना के बाद प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल, वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना समेत कई मंत्रियों और अधिकारियों ने पहुंचकर उनको निष्पक्ष जांच और उनकी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। पुलिस ने सुसाइड नोट और डायरी मिलने के बाद आरोपी सूदखोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसको जेल भेज दिया। घटना को छह महीने बीत चुके हैं। अखलेश के पिता की मांगों में से एक भी मांग पूरी नहीं की गई।
मकान का बैनामा रद्द करने की थी मांग
अखिलेश के पिता अशोक गुप्ता ने बताया कि उन्होंने मंत्रियों से मांग की थी कि धोखाधड़ी करके अखिलेश का मकान का बैनामा सूदखोर ने कराया था। उस मकान का बैनामा रद्द कर परिवार के नाम कराया जाए। परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी दी जाए। साथ जीवनयापन के लिए मुआवजा दिया जाए। इन मांगों मे से एक भी मांग पूरी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि करीब 20 दिन पहले अखिलेश की मां विजया गुप्ता ने मांगों को लेकर लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय जाकर प्रार्थना पत्र दिया था। लेकिन उस प्रार्थना पत्र पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।