शाहजहांपुर। देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों को समर्पित शहीद संग्रहालय कैंट क्षेत्र में बनाया है। इस संग्रहालय में 1857 की क्रांति से लेकर 1947 की आजादी तक के इतिहास को समेटा गया है। इसकी संकल्पना काकोरी केस के क्रांतिकारी प्रेमकृष्ण खन्ना ने कभी ‘बिस्मिल संग्रहालय’ के रूप में की थी।
जीएफ कॉलेज के सामने छावनी परिषद मैदान पर बने शहीद संग्रहालय की गैलरी में 1857 से लेकर 1947 तक के इतिहास का सिलसिलेवार वर्णन है। इनके अलावा काकोरी ट्रेन कांड, अंग्रेजों से लोहा लेती झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, लाल किले पर स्वतंत्रता का जश्न मनाते लोग, इलाहाबाद जेल में कैद ठाकुर रोशन सिंह के किताब पढ़ने का दृश्य, काकोरी एक्शन से संबंधित अदालत का दृश्य आदि को भी प्रस्तुत किया गया है। शहीद संग्रहालय में लाइब्रेरी भी है, जिसमें इतिहास से जुड़ी किताबें हैं।
इनमें स्वाधीनता संग्राम, काकोरी कांड, अमर शहीदों के लिखी किताबें और रचनाएं हैं। भव्य संग्रहालय में कदम रखने वाले आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत से अमर शहीदों के संघर्ष और उनके बलिदानों से रूबरू होकर निकलते हैं, तो उनकी छाती गर्व से फूली होती है। शरीर रोमांचित और आंखें शहीदों के आचमन के लिए श्रद्धांजलि से भरी होती हैं। कुल मिलाकर आसपास के जिलों में भी इस तरह का संग्रहालय नहीं है। संवाद
नौ करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ शहीद संग्रहालय
कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयासों से छावनी परिषद की जमीन पर शहीद संग्रहालय का निर्माण हुआ है। इसमें नौ करोड़ रुपये की लागत आई है। छावनी परिषद के नामित सदस्य अवधेश दीक्षित ने बताया कि शहीद संग्रहालय काकोरी एक्शन के क्रांतिकारियों व अमर शहीदों की याद में बना है। शहीद संग्रहालय के निर्माण को भारत सरकार की ओर से पांच करोड़ और प्रदेश सरकार ने चार करोड़ रुपये दिए है। शहीद संग्रहालय की भूमि छावनी परिषद की है, जिसको तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पारेकर व कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयास से वी फोर से सी लैंड में कन्वर्ट कराकर आवंटित किया था।
उद्योगों और पर्यटन स्थलों के मॉडल रखे गए
संग्रहालय में जिले के उद्योगों, पर्यटन स्थलों और अन्य प्रमुख स्थानों के मॉडल बनाए गए हैं. जो आकर्षण का केंद्र हैं। प्रमुख रूप से ओसीएफ, केआर पेपर मिल, रिलायंस थर्मल पॉवर, हनुमत धाम, रामचंद्र मिशन आश्रम का मॉडल रखा गया है। शहीद संग्रहालय में संजोई स्मृतियों और स्वाधीनता संग्राम से जुड़े इतिहास को जानने, समझने और देखने के लिए कभी भी जाया जा सकता है। नवनिर्मित शहीद संग्रहालय में 26 जनवरी तक ही निशुल्क प्रवेश दिया गया, अब छावनी परिषद की ओर से तय 25 रुपये पर टिकट लेना होता है।
ओपन थियेटर में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
अमर शहीदों के जिले की बड़ी पहचान रंगमंच के लिए भी है। गांधी भवन प्रेक्षागृह में रंगमंच के कलाकार आए दिन नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हैं। शहीद संग्रहालय में भी ओपन थियेटर का निर्माण हुआ है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकेंगे। थियेटर में 250 लोगों के बैठने की व्यवस्था और कलाकारों के लिए ग्रीन रूम भी है।
फव्वारा और आर्मी के टैंक आकर्षण का केंद्र
संग्रहालय के ठीक सामने ही एक फव्वारा बनाया गया है। इसके आसपास पौधरोपण कर सौंदर्यीकरण हुआ है। साथ ही गेट पर आर्मी के दो टैंक रखे गए हैं। शहीद संग्रहालय में फूड कोर्ट खोला जाएगा और पार्क का निर्माण भी होगा।
अंदरूनी कार्य के चलते बंद रहा संग्रहालय
वर्तमान समय में शहीद संग्रहालय के भीतरी काम के चलते इसे पर्यटनों के लिए बंद रखा गया है। संग्रहालय का संचालन देखने वाले छावनी परिषद के सैनेट्री इंस्पेक्टर अनमोल अग्निहोत्री ने बताया कि संग्रहालय में एसी लगाया जाना था, जिसका काम हो चुका है। वायरिंग बंद की जा रही है। इसकी वजह से संग्रहालय बंद है। काम पूरा होते ही इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
शहीद संग्रहालय में दर्शाया गया लाल किले पर स्वतंत्रता समारोह का दृश्य 15 अगस्त 1947- फोटो : SHAHJAHANPUR
शहीद संग्रहालय की गैलरी में लगी अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की रचना- फोटो : SHAHJAHANPUR
शहीद संग्रहालय शाहजहांपुर- फोटो : SHAHJAHANPUR
शहीद संग्रहालय में बना ओपन थियेटर- फोटो : SHAHJAHANPUR