शाहजहांपुर में कैंट में श्रीराम कथा सुनाते संत विजय कौशल। संवाद
शाहजहांपुर। मंगलमय परिवार की ओर से कैंट स्थित रामलीला मैदान पर आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन मंगलवार को संत विजय कौशल ने भगवान श्रीराम के मिथिला आगमन, अहिल्या उद्धार, ताड़का वध और विश्वामित्र के राजा दशरथ से श्रीराम को मांगने की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं, तो केवल अधर्म का नाश करने नहीं, बल्कि आत्माओं का उद्धार करने के लिए आते हैं।
उन्होंने कहा कि अहिल्या पत्थर नहीं थीं, वह अहंकार और अविश्वास की प्रतीक थीं। जब श्रीराम के चरण उन पर पड़े, तो उनके भीतर की चेतना जाग उठी। यही रामकृपा है, जो स्पर्श से नहीं, भावना से उद्धार करती है। श्रीराम का संदेश था कि बड़े का आदर और गुरु की आज्ञा ही मनुष्य को परम पद तक पहुंचाती है।
इससे पहले कथा का शुभारंभ आचार्य सुबोध शुक्ला, अंकुर शुक्ल, बृजराजदास, वरुण शर्मा, विनीत शुक्ला और आलोक त्रिवेदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया। मुख्य यजमान त्रिलोकी नाथ पांडे, दीपू मिश्रा और रीता मिश्रा रहे। संचालन अजय शर्मा ने किया।
शाहजहांपुर में कैंट में श्रीराम कथा सुनाते संत विजय कौशल। संवाद