और भी कई औद्योगिक इकाइयां बंदी के कगार पर
उद्योग जगत पर भारी पड़ रही बगैर तैयारी के नोटबंदी
विमुद्रीकरण की मार से लघु-सूक्ष्म इकाइयां प्रभावित
देश-दुनियां में जिले को ख्याति दिलाने वाला जिले का उद्योग जगत भी केंद्र सरकार की नोटबंदी के साइड इफेक्ट से अछूता नहीं है। विमुद्रीकरण की मार से सबसे ज्यादा लघु एवं सूक्ष्म श्रेणी की औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हैं। बेसन की एक फैक्ट्री में कई दिन से उत्पादन ठप है। और भी कई इकाइयां बंद होने के कगार पर हैं। दरअसल न तो लेबर मिल रही है और न ही मजदूरों को भुगतान करने के लिए पैसा है। इसके बावजूद उद्यमी प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए यह भी कहते हैं कि सरकार पूरी तैयारी केे साथ नोटबंदी लागू करती तो और बेहतर होता।
मगरमच्छ पकड़ने को मारी जा रहीं मछलियां
नगदी संकट से बाजार में सन्नाटा जैसी स्थिति है। फैक्ट्रियों के ऑर्डर रद हो रहे हैं। सरकार का निर्णय उचित है, लेकिन पांच सौ के नोट का अभी तक पता नहीं। श्रमिकों को भुगतान नहीं मिल रहा है। मशीन का बेयरिंग भी टूट जाए तो बाजार से खरीदना मुश्किल हो रहा है। मगरमच्छ पकड़ने के लिए मछलियां मारी जा रही हैं। -अशोक अग्रवाल, निदेशक, विद्या प्लाईवुड
राइस मिलों में घट गया चावल उत्पादन
नोटबंदी देश हित में अच्छा कदम, लेकिन छोटी-छोटी दिक्कतें खत्म होनी चाहिए। किसान धान का नगद पेमेंट चाहता है, लेकिन देने के लिए पैसा नहीं है। इसलिए किसान न तो मंडियों में पहुंच रहे हैं और न ही सरकारी क्रय केंद्रों पर। जिले की 112 राइस मिलें अनुकूल हालातों में 24 घंटे चावल उत्पादन करने में सक्षम हैं, लेकिन लेबर और धान आवक घटने से मिलें बमुश्किल 12 घंटे चल रही हैं।
-रमाकांत मोदी, अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन
तैयार, कच्चे माल का ट्रांसपोर्टेशन प्रभावित
छोटे नोटों की कमी के कारण थोड़ी समस्याएं पैदा हुई हैं और डेली वेज वर्कर उनके घेरे में अधिक आए हैं। ट्रांसपोर्टर भी कैश पेमेंट लेते हैं। भुगतान के लिए रकम नहीं होने से तैयार माल की सप्लाई और बाहर से कच्चा माल मंगाने में दिक्कत हो रही है। पांच सौ का नोट आम आदमी तक पहुंचते ही सब नार्मल हो जाएगा।
-विनम्र अग्रवाल, निदेशक, जी सर्जीवियर
बाजार में मंदी से बंद करनी पड़ी बेसन फैक्ट्री
नोट बंदी ने सारा व्यापार चौपट कर दिया है। पेमेंट के लिए कैश नहीं होने से मजदूर नहीं मिल रहे। रोज 50 क्विंटल बेसन उत्पादन क्षमता है, लेकिन जो माल तैयार किया, बाजार में उसकी डिमांड नहीं हुई। इसलिए पांच दिन पहले फैक्ट्री बंद करनी पड़ी। बाजार में करेंसी का रोटेशन सामान्य बनाया जाना चाहिए।
-विकास अग्रवाल, संचालक, बेसन उद्योग इकाई
बैंकों से रकम की निकासी को बनाएं आसान
इन दिनों बैंकों से चार-छह हजार रुपये हासिल कर लेना किला फतह करने जैसा हो गया है। पांच सौ का नोट नहीं आने से आम मध्यवर्गीय, खासकर लेबर क्लास बहुत परेशान है। बैंक स्टाफ केवल नोट जमा करने में जुटा रहता है। कैश होने पर कुछ ही देर में बंटकर खत्म हो जाता है। नोटों की कमी दूर होनी चाहिए।
-विनय कुमार, नमकीन एवं रस्क निर्माता