जलालाबाद (शाहजहांपुर)। कोलाघाट पुल की शनिवार से लोड टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। दस दिन (14 से 23 सितंबर) तक पुल पर आवागमन पूरी तरह से बंद रहेगा। इससे कलान तहसील में रामगंगा की कटरी में बसे सैकड़ों ग्रामीणों के लिए आवागमन में दिक्कतें बढ़ जाएंगीं। उन्हें अतिरिक्त खर्च के साथ जिला मुख्यालय आने के लिए 55 किमी यात्रा ज्यादा करनी पड़ेगी।
बरसात के कारण आसपास के वैकल्पिक रास्ते जलभराव व कीचड़ से घिरे हैं। इस कारण लोगों को जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए फर्रुखाबाद जनपद के राजेपुर होकर सफर करना पड़ेगा, जो काफी खर्चीला होगा। बदायूं सीमा से सटे जनपद के कई गांवों की जिला मुख्यालय से दूरी 70 से बढ़कर 125 किमी तक हो जाएगी।
तीन साल पहले पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद लोक निर्माण विभाग हर साल कटरी क्षेत्र के लोगों के आवागमन के लिए कोलाघाट पर पैंटून पुल के वैकल्पिक रास्ते का निर्माण कराता है। इस दौरान रामगंगा व बहगुल नदियां पार करने के लिए नाव की व्यवस्था बनी रही। अब बरसात के मौसम में पैंटून पुल नहीं हैं। वैकल्पिक रास्तों पर जलभराव के बाद कीचड़ हो गया है।
नदियां भी पूरे उफान पर हैं। इससे नाव से सफर जोखिम भरा हो गया है। इसलिए लोड टेस्ट के लिए दस दिन तक पुल बंद रहने से आवागमन के लिए राजेपुर होकर आना-जाना कलान, मिर्जापुर और परौर की कटरी में बसे लोगों की मजबूरी होगी।
जनपद के बाराकलां समेत कई गांव बदायूं जनपद के करीब हैं। इन गांवों के लोगों के लिए जिला मुख्यालय वाया राजेपुर की दूरी सवा सौ किलोमीटर से ज्यादा दूर है। इस क्षेत्र से मुकदमे की पैरवी या किसी अन्य सरकारी कार्य से जिला मुख्यालय जाने वाले जिन ग्रामीणों के पास अपना वाहन नहीं है, उनकी शाम तक घर वापसी होने में भी संशय रहेगा।
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कटरी में आवागमन के साधन भी सीमित
पुल बंद होने पर कटरी के लोगों के लिए आवागमन के साधन सीमित होने से दिक्कत ज्यादा होगी। बदायूं से कलान, मिर्जापुर व राजेपुर होकर फर्रुखाबाद जाने वाली रोडवेज बसों की संख्या बहुत कम है। फर्रुखाबाद की बस राजेपुर से जमापुर मोड़ होकर जाती है। ऐसे में शाहजहांपुर जाने वालों को राजेपुर उतरना होगा। वहां से करीब पांच किमी दूर फर्रुखाबाद हाईवे से जुड़ने वाले मोड़ तक आवागमन का कोई साधन नहीं है। लोगों को यह दूरी तय करने में डग्गामार वाहन ही सहारा बनेंगे।
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पशोपेश में नौकरीपेशा कर्मचारी
कलान तहसील क्षेत्र में बैंक, ब्लाॅक व सरकारी स्कूलों में नौकरी करने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों का रोजाना आना-जाना होता है। शाहजहांपुर से आने वाले कई कर्मचारियों की बाइकें जलालाबाद में खड़ी रहती हैं। यहां आने के बाद वे बाइक से अपने कार्यस्थल पहुंच जाते हैं और इसी तरह उनकी वापसी होती है। कई जिलों के कर्मचारी कटरी क्षेत्र में तैनात हैं, लेकिन परिवार के लिए किराये का मकान लेकर जलालाबाद में रहते हैं। यह सभी इस बात से परेशान हैं कि समय से कार्यस्थल कैसे पहुंचेंगे।