एक दिन पहले की तुलना में मंगलवार को सुबह कोहरे का असर कुछ कम रहा, लेकिन आसमान पर छाए बादल घने होने से दिन में आठ बजे से अंधेरा होने लगा। दो घंटे बाद हवा चलने के साथ रिमझिम फुहारें गिरने लगीं। इसके कुछ देर बाद ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। वातावरण में नमी बढ़ने के साथ ठिठुरन ने आम से लेकर खास तबके तक को सताना शुरू कर दिया। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार शाम पांच बजे तक 1.6 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
सर्दी में बूंदाबांदी से ठंड का प्रकोप बढ़ा तो सड़कों और बाजारों में चहल-पहल घटने के साथ सन्नाटा छाने लगा। बच्चों से लेकर बड़े तक गर्म कपड़ों से लैस होकर स्कूलों और दफ्तरों-दुकानों के लिए बाहर निकले। इस बीच, मौसम खराब होते देख कई स्कूलों में समय से पहले छुट्टी हो गई। बच्चे बूंदाबांदी के बीच रिक्शों पर अटखेलियां करते हुए घरों तक पहुंचे। मौसम की खराबी के कारण सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति भी कम देखी गई। कलक्ट्रेट ओर विकास भवन के कई कार्यालयों में कर्मचारी खाली समय में रूम हीटर पर हाथ सेंकते और चाय की चुस्कियां लेते देखे गए।
गेहूं समेत दलहनी व तिलहनी फसलें लेंगी बढ़वार
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बूंदाबांदी से गेहूं के पौधे तेजी से बढ़वार लेंगे और दलहनी फसलों सहित सरसों, राई, तिल आदि तिलहन की पैदावार भी बेहतर होगी। कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह के अनुसार मंगलवार को गिरी फुहारों से गेहूं के पौधों में कल्ले तेजी से विकसित होंगे ओर इससे बालियों की संख्या बढ़ जाएगी। चना, मटर, मसूर जैसी दलहनी फसलों के लिए बूंदाबांदी की सिंचाई की जरूरत पूरी कर दी है। सरसों, राई, लाही आदि तिलहन की उपज भी बढ़ जाएगी। यदि बारिश का दौर आगे भी जारी रहा तो खेतों में तैयार हो चुके आलू पर झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाएगी। इसी तरह मौसम इसी तरह बना रहा और आसमान साफ नहीं हुआ तो सरसों में माहू कीट लग सकता है।