नरौठा गांव में जिस खेत में शव मिला, वह वन विभाग की खुटार बीट में आता है। गांव नरौठा हंसराम के रामआसरे का खेत गांव नरौठा देवीदास में है। सोमवार की दोपहर रामआसरे गन्ने के खेत में गया तो उसने गुलदार का शव पड़ा देखा। गुलदार को देख रामआसरे शोर मचाता हुआ भागा। गुलदार होने की खबर से गांव में हड़कंप मच गया। तमाम लोग लाठी, कांता आदि लेकर खेत की ओर चल दिए। कुछ लोग हिम्मत कर रामआसरे के बताए स्थान पर पहुंचे और खेत में शोर शराबा किया लेकिन गुलदार में कोई हलचल नहीं दिखी तो लोगों को समझ में आ गया कि वह मर चुकी है। लोग शव को उठाकर हाइवे पर ले आए। ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी। पहले यही माना गया कि गुलदार का शिकार हुआ है, सो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एसओ जसवीर सिंह और फारेस्टर कामता प्रसाद अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। पीपुल फार एनीमल संस्था के जिला प्रभारी अनुपम शुक्ला भी अपने सदस्यों की टीम के साथ मौके पर गए और वन अधिकारियों से गुलदार की मौत के बारे में जानकारी ली।
पोस्टमार्टम से ही खुलेगा मौत का राज
मृत पाई गई मादा गुलदार लगभग ढाई से तीन वर्ष की थी। उसकी नाक से खून भी निकला था। वन अधिकारियों का अंदाजा है कि गुलदार का शव तीन से चार दिन पुराना है। अधिकारी अभी उसकी मौत पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। पशु अस्पताल खुटार के पूर्व प्रभारी डॉ. धीरज गंगवार के अनुसार रीढ़ और सिर में गहरी चोट लगने से नाक से खून आ सकता है। गुलदार की मौत की असली वजह शव देखने और पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग सकती है। वहीं वन विभाग के एसडीओ मोहम्मद उमर खां ने बताया कि उन्हें मौत की जानकारी मिली है। मौत किस कारण हुई, इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही लग सकेगा।
गुलदार की मौत के मामले में तमाम तरह की चर्चाएं
गन्ने के खेत के अंदर शव मिलने से उठे कई सवाल
खुटार। गन्ने के खेत में गुलदार का शव मिलने पर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं। जिस स्थान पर शव मिला है वहां पशुओं की आपसी लड़ाई के कोई निशान नहीं मिले हैं। गुलदार के चोट लगने जैसी भी कोई स्थिति नहीं दिख रही है।
जिस स्थान पर गुलदार का शव मिला है, वहां से जंगल लगभग एक किमी की दूरी पर है। जंगल बिल्कुल भी घना नहीं है और लोगों के खेत जंगल के पास ही हैं। किसान दिन भर खेत की रखवाली करते हैं और कुत्ते भी बांधे रखते हैं। बड़ा सवाल है कि यदि मादा गुलदार खेत के पास आई तो किसानों ने उसे क्यों नहीं देखा और गुलदार ने कुत्तों पर हमला क्यों नहीं किया। गन्ने के जिस खेत में शव पाया गया है, वहां कोई ऐसा सामान भी नहीं था जिससे गुलदार घायल होती। वहीं शव पर इतनी गंभीर चोट नहीं मिली जिससे मौत हो सके। एक चर्चा यह भी है कि गुलदार की मौत करंट लगने से हुई और फिर उसका शव यहां फेंक दिया गया। दरअसल, आसपास गांवों में कई लोगों ने जानवरों से फसल बचाने के लिए बिजली के तारों की फेंसिंग करा रखी है। इन तारों में काफी करंट रहता है। हो सकता है कि गुलदार तारों में फंस गई हो और करंट लगने पर भी हट न पाई हो।
कोई बाल नोंचने में लगा, कोई फोटो खिंचाने को
खुटार। दोपहर एक बजे गुलदार का शव पड़े होने की जानकारी वन अधिकारियों को लग गई थी, इसके बाद भी अधिकारी काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंच सके। किसी वन कर्मी या अधिकारी के मौके पर नहीं होने से लोग गुलदार के शव से बाल नोचते हुए देखे गए। लोगों का कहना था कि बाघ और गुलदार के बाल तंत्र-मंत्र सहित तमाम कामों में आते हैं। कई लोग गुलदार के शव के पास फोटो खिंचवाने में जुटे हुए थे। फारेस्टर कामता प्रसाद वर्मा दिन में लगभग तीन बजे मौके पर पहुंचे। इसके बाद रेंज कार्यालय से कर्मचारी पहुंचे और भीड़ को मौके से खदेड़ा। रेंजर एसएन यादव मौके पर नहीं पहुंचे। गुलदार के शव को खुटार रेंज मुख्यालय मैलानी ले जाया गया और वाहन में रखकर आईवीआरआई बरेली केे लिए भेजा गया।
मैलानी क्षेत्र से भटककर आने का अनुमान
वर्ष 2011 में सात शावकों ने लिया था जन्म
पुवायां। वन अधिकारियों का अनुमान है कि यह गुलदार खीरी के मैलानी जंगल से खुटार के जंगल में आई है। दिसंबर 2011 में खीरी की इसी मैलानी और खैरटिया बीट में मादा गुलदार ने सात बच्चों को जन्म दिया था। खीरी की मैलानी बीट में चार और खैरटिया बीट में रईस के गन्ने के खेत में गुलदार ने तीन शावर को जन्म दिया था। खुटार रेंज का जंगल मैलानी और दुधवा नेशनल पार्क केे जंगलों से जुड़ा हुआ है। खुटार बीट में रोजाना तमाम पेड़ काटकर ईंधन के रूप में बेचे जाने से जंगल बाग जैसा होकर रह गया है। इस कारण जंगल से वन्य पशुओं का भी सफाया हो गया है।