शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण गरिमा सिंह ने दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसी मुकदमे के एक आरोपी की मौत फैसले के चार दिन पहले हो गई थी। दो दोषियों को पूर्व में सजा हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 जून 1998 में एक महिला ने रोजा थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसकी 16 वर्ष की बेटी को 27 मई को बालकराम, शैलेंद्र, राजेंद्र उर्फ कल्लू जबरदस्ती शादी करने के लिए अपहरण कर ले गए थे। अपहरण की घटना को गांव के कुछ लोगों ने देखा था। वह काफी समय तक बेटी की तलाश करती रही, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
पुलिस ने बालकराम, शैलेंद्र और राजेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचना के दौरान मामले में पूरन की संलिप्तता पाए जाने पर उसके खिलाफ भी आरोपपत्र अदालत भेजा गया। न्यायालय में बालकराम और शैलेंद्र का परीक्षण पूर्व में किया गया, जिसमें दोनों दोषी साबित हुए। 2003 में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। राजेंद्र उर्फ कल्लू और पूरन का विचारण अदालत में किया जा रहा था। 18 नवंबर 2024 को पूरन की मृत्यु हो गई।
अपर सत्र न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान पांच गवाहों के बयानात और विशेष लोक अभियोजक के तर्कों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने राजेंद्र उर्फ कल्लू को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 28 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।