एसएस कॉलेज में प्राचार्य डॉ. अनुराग के साथ लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर स्टडी सेंटर के पदाधिकारी
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शाहजहांपुर। एसएस लॉ कॉलेज में लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र की ओर से मंगलवार को संकल्प दिवस पर गोष्ठी हुई। इसमें भारतीय संसद द्वारा 22 फरवरी 1994 को पारित संकल्प को याद किया गया।
मुख्य अतिथि पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष बाबूराम गुप्ता ने कहा कि 1990 के आरंभ में कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित आतंकवादियों की घुसपैठ और भारत विरोधी आतंकवाद चरम पर था। तब इन कट्टरपंथी आतंकियों ने 19 जनवरी 1990 को मानवता को शर्मसार कर देने वाला दुर्दांत आतंकियों ने नरसंहार कर डाला। हजारों कश्मीरी हिंदुओं को कश्मीर से बेदखल कर दिया। तभी से लाखों हिंदू शरणार्थी के रूप में अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खाने पर विवश है। आज हमारा केंद्रीय नेतृत्व कठोर फैसला लेने में सक्षम है जिसके आधार पर धारा 370 को हटाया और अब हम अपनी खोई हुई भूभाग को वापस लेने के लिए प्रयासरत हैं।
एसएस कॉलेज के सचिव डॉ. अवनीश मिश्रा ने कहा कि चीन ने गिलगित बालटिस्तान क्षेत्र में इकोनामिक कॉरिडोर बना लिया है, जिसे वह ग्वादर पोर्ट से जोड़ रहा है। डॉ. नलनीश चंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय संसद द्वारा 22 फरवरी, 1994 को ध्वनिमत से संकल्प पारित किया था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के प्रभारी डॉ. आलोक सिंह ने अनधिकृत कश्मीर और लद्दाख के सांस्कृतिक और सामरिक महत्व को बताया। डॉ. संदीप अवस्थी ने सभी का आभार जताया। वहीं, डॉ. श्रीकृष्ण यादव ने जलालाबाद, डॉ अनिल कुमार ने तिलहर में संकल्प दिवस के पत्रक वितरित कर लोगों को जागरूक किया। जबकि अधिवक्ता ओम सिंह ने अधिवक्ता परिषद की बैठक में संसद द्वारा पारित संकल्प पर चर्चा किया।