शाहजहांपुर। बरेली में बीसलपुर मार्ग पर हुए हादसे की तरह नगर में दुर्घटना होने से इन्कार नहीं कर सकते हैं। शहर में कई जगहों पर अंधे मोड़ बने हुए हैं। जहां पर संकेतक नहीं होने के चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं।
कचहरी से जीआईसी तिराहा की ओर जाने वाले मार्ग पर प्रसाद भवन के पास अंधा मोड़ है। ज्यादा घुमाव होने के कारण वाहनों के आने का पता नहीं लग पाता है। इसके चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं। कलक्ट्रेट नजदीक होने से अधिकारियों की गाड़ियां दिनभर इस ओर से निकलती हैं। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पिछले साल लगातार हुए हादसों के चलते अंधे मोड़ पर हादसों से बचाव के लिए शीशा लगाया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद शीशा टूट गया। इसी तरह इमली रोड पर मजार के पास अंधे मोड़ पर तेज रफ्तार वाहन टकरा जाते हैं। अभी पिछले माह कार के सामने अचानक आया ई-रिक्शा टकराकर पलट गया था। चालक का पैर टूट गया था। साथ ही साइकिल सवार से टकराने के बाद युवक की हालत देख कार चालक भाग गया था। यहां से गुजर रहे बाइक सवार मोहल्ला गदियाना के सुनील और उनके दोस्त मुनीश ने बताया कि जब सड़क जर्जर थी। तब कम हादसे होते थे, लेकिन जब से सड़क बन गई है, तब से हादसों की संख्या बढ़ गई है।
पोस्टमाॅर्टम हाउस के पास दो अंधे मोड़ हैं। एक मोड़ पोस्टमॉर्टम हाउस के पास और दूसरी डैम के पास है। दोनों मोड़ अंजान लोगों के लिए जानलेवा है। इस तरह रेती रोड, रोजा, बरेली मोड़ आदि स्थानों पर भी कई अंधे मोड़ हैं। यातायात प्रभारी विनय पांडेय ने बताया कि ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। संकेतक लगवाए जाएंगे। लोग भी यातायात नियमों का पालन करते हुए ऐसे स्थानों पर वाहन की रफ्तार धीमी रखें।
कोहरे में अंधे मोड़ हो जाते और खतरनाक
अंधे मोड़ कोहरे में और खतरनाक हो जाते हैं। पिछले साल कोहरे में इन अंधे मोड़ों पर कई हादसे हुए थे। कई लोग चोटिल हुए थे। कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए थे। इन अंधे मोड़ों पर दुर्घटनाएं बढ़ने का मुख्य कारण संकेतक एवं स्पीड ब्रेकर न होना भी है।
शहर में प्रसाद भवन पास अंधी मोड़ पर बना रहता हादसे का खतरा। संवाद
शहर में प्रसाद भवन पास अंधी मोड़ पर बना रहता हादसे का खतरा। संवाद