खुटार (शाहजहांपुर)। जिले में सबसे ज्यादा वन संपदा से भरपूर खुटार रेंज में कर्मचारियों की कमी के कारण अवैध कटान पर रोक नहीं लग पा रही है। यहां आए दिन जंगलों से साल और साखू के बेशकीमती पेड़ काट कर बेच दिए जाते हैं।
शाहजहांपुर जिले में सबसे ज्यादा 5600 हेक्टेयर वन क्षेत्र खुटार रेंज के पास है। यह वन क्षेत्र पुवायां तहसील की तीन ब्लॉकों खुटार, बंडा और पुवायां क्षेत्र के गंगसरा तक फैला हुआ है। इसके उलट अगर इसकी रखवाली की बात करें तो खुटार रेंज में कर्मचारियों की भारी कमी है। यहां रेंजर मनोज श्रीवास्तव के अलावा, डिप्टी रेंजर चंद्र सिंह दफौती, फॉरेस्टर नंदा बल्लभ पांडे, पुष्पेंद्र, संदीप यादव ही हैं। पुष्पेंद्र कनौजिया अवैध कटान के मामले में निलंबित हो चुके हैं। कुल दस बीट होने के कारण एक-एक फॉरेस्टर को दो-दो वीटों का चार्ज दिया गया है। लापरवाही का आलम यह है कि अधिकारियों को यह ही पता नहीं है कि खुटार रेंज में वाॅचरों की संख्या कितनी है।
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सात माह में दर्ज हुए 50 से अधिक मुकदमे
वैसे तो रेंज के जंगलों में रोजाना कटान होता रहता है, लेकिन वह कागजों में दर्ज नहीं होता है। अगर सही से कार्रवाई की जाए तो एक माह में ही 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं। अगर वन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो एक अप्रैल, 2023 से दिसंबर, 2023 तक तक कटान के कुल 44 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसी के साथ ही 35 से 40 लाख का जुर्माना भी वसूला गया है। रेंजर मनोज श्रीवास्तव के अनुसार दर्ज किए गए सभी मुकदमे फील्ड में कटान हैं, जंगल से कटान का कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। रेंज में स्टाॅफ की कमी से भारी समस्या हो रही है। अगर कर्मचारियों की तैनाती हो जाए तो कोई परेशानी नहीं होगी।
दूसरे जिले में कार्यालय से भी होती है समस्या
वन विभाग की ओर से खुटार रेंज के कार्यालय लखीमपुर खीरी जनपद के मैलानी क्षेत्र ने बनवाया गया है। रेंजर और कार्यालय का स्टाफ भी वहीं पर रहता है। कई फॉरेस्टर भी रेंज कार्यालय पर रहते हैं। इस से खुटार रेंज में कम भ्रमण होने के कारण भी पूरी निगरानी नहीं हो पाती है। सिर्फ गंगसरा में वन चौकी पर स्टाफ रहता है और अन्य कई चौकियां खाली पड़ी रहती है।
वर्जन
स्टाफ की कमी के बाद भी कटान के मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में काफी कमी आई है। वनकर्मियों की संख्या और बढ़े तो और भी बेहतर तरीके से वन और वन्य संपदा की सुरक्षा की जा सकेगी। कम कार्मिक और कम संसाधनों मे भी पूरी तरह से वन संपदा की सुरक्षा की जा रही है। - मनोज श्रीवास्तव, रेंजर खुटार