शाहजहांपुर। देवी मां की आराधना का पर्व वासंतिक नवरात्र शुभ संयोगों के बीच दो अप्रैल से शुरू हो रहे हैं और दस अप्रैल तक चलेंगे। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन होंगे। कोई तिथि न खंडित (क्षय) है और न वृद्धि को प्राप्त है। संतुलन को बनाए रखने वाला, भारतीय समाज में सौम्यता तथा संतुलन की दृष्टि से उत्तम रहेगा। नवरात्रों को लेकर घरों व मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गईं हैं। बाजार में खरीदारी के लिए लोग उमड़ने लगे हैं।
कोरोना संक्रमण ने तीज-त्योहारों पर ग्रहण लगा दिया था। दो साल बाद दोबारा अपने पर्वों को धूमधाम से मनाने का मौका मिल रहा है। अप्रैल में हिंदू नववर्ष व वासंतिक नवरात्रों की शुरुआत होने जा रही है। पहले दिन घटस्थापना होगी। इसके बाद लगातार नौ दिन तक मां की उपवास की जाएगी। नौवें दिन हवन के बाद कन्या पूजन होता है। मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्र के नवमी तिथि को ही भगवान राम का जन्म हुआ था।
नवरात्र पर पांच सर्वार्थसिद्धि योग
चौक मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना करने के बाद माता के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना होती है। इस दिन माता को भोग लगाकर और दुर्गासप्तशी का पाठ किया जाता है और अंत में माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसी तरह से अगले आठ दिनों तक देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की आराधना होती है। बताया कि देवी मां की आराधना के पर्व वासंतिक नवरात्रों पर इस बार पांच सर्वार्थसिद्धि, रविपुष्य योग और रवियोग बनेंगे। आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन और धृति भी रहेंगे। ऐसे में नई चीजों की खरीद-बिक्री और मकान या जमीन में निवेश के लिए समय बहुत ही शुभ रहेगा।
कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
श्री रुद्र बालाजी धाम के पुजारी केके शास्त्री ने बताया कि वासंतिक नवरात्र पर कलश स्थापना के लिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी दो अप्रैल शनिवार के दिन सूर्योदय 5.50 से 8.22 बजे तक का समय विशेष शुभ है। जो लोग किसी कारणवश इस शुभ मुहूर्त में घटस्थापना न कर सकें, उनके लिए दूसरा मुहूर्त कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का समय सूर्योदय से पूर्वाह्न 11:28 बजे तक शुभ है।
नवरात्रि पूजन विधि
- सर्वप्रथम एक चौकी पर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करके उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और कलश की स्थापना करें।
- कलश की स्थापना करने के बाद मां दुर्गा को लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल फूलों की माला और श्रृंगार आदि की वस्तुएं अर्पित करें और धूप व दीप जलाएं।
- यह सभी वस्तुएं अर्पित करने के बाद गोबर के उपले से अज्ञारी करें। इसमें घी, लौंग, बताशे, कपूर आदि चीजों की आहुति दें।
- इसके बाद नवरात्रि की कथा पढ़ें और मां दुर्गा की धूप व दीप से आरती उतारें और उन्हें प्रसाद का भोग लगाएं।
- नौ दिनों तक अलग-अलग माताओं की विभिन्न पूजा उपचारों से पूजन, अखंड दीप, साधना, व्रत उपवास, दुर्गा सप्तशती व नवार्ण मंत्र का जप करें। अष्टमी को हवन व नवमी को नौ कन्याओं का पूजन करें।
नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की आराधना
नवरात्र में देवी मां के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है। माता का प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री, द्वितीय ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कुष्मांडा, पंचम स्कंदमाता, षष्ठम कात्यायनी, अष्टम कालरात्रि, नवम महागौरी और दशम सिद्धिदात्री की पूजा होगी।
घरों व मंदिरों में शुरू हुई तैयारी
वासंतिक नवरात्रों को लेकर घरों व मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गईं। बृहस्पतिवार को ही कई घरों में साफ-सफाई का काम काम हुआ। इसके साथ ही देवी मां के मंदिरों में भी सफई और पुताई चल रही है। दो से 10 अप्रैल तक वासंतिक नवरात्रों के चलते देवी मंदिरों पर दर्शन व पूजन के लिए पहुंचना श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहेगा।
बाजार में देवी मां के शृंगार का सामान व फल की खरीदारी बढ़ी
बाजार में देवी मां के शृंगार व पूजन सामग्री के साथ फलों की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा रही है। शहर के बहादुरगंज बाजार में सरस्वती प्रेस वाली गली तथा तिकुनिया के पास पूजन सामग्री और देवी मां के शृंगार से संबंधित दुकानें सजी रहीं तथा अधिकांश महिलाएं खरीदारी के लिए पहुंची। उन्होंने देवी मांग के लिए रंग-बिरंगे कपड़े खरीदे। शृंगार का सामान भी लिया। इसके बाद जौ, धूप, कलावा, मिट्टी का कलश आदि पूजन सामग्री की खरीदारी करके घर ले गईं। तो वहीं फलों के ठेलों पर खरीदारी करने वालों की भीड़ रही। विक्रेताओं ने फलों के दाम भी बढ़ा दिए हैं। पहले जो केले 20 रुपये दर्जन मिलते थे बृहस्पतिवार को उनके दाम 30 से 35 रुपये दर्जन थे। अमरुद, पपीता, चीकू, सेब, अनार जैसे फलों के दाम आसमान छू रहे हैं।
शाहजहांपुर में नवरात्रि पर पूजा अर्चना के लिए मां दुर्गा के लिए चुन्नी खरीदती महिलाए । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR