बैंकों में कैश खत्म होने पर भड़का गुस्सा
केंद्र सरकार की नोट बंदी के बाद उपजा पुराने नोटों का संकट टलने का नाम नहीं ले रहा है। शहर समेत जिले अधिकांश बैंक शाखाओं पर बुधवार को भी भीड़ उमड़ी और रोज की तरह चालू एटीएम के आगे लंबी-लंबी लाइनें लगीं, लेकिन हर जगह कैश के लिए मारामारी का आलम रहा। बैंकों मेें नगदी खत्म होने या फिर मांग के अनुरूप भुगतान नहीं मिलने पर लोगों का गुस्सा जमकर फूटा।
घरेलू खर्च के लिए सिर्फ दो हजार रुपये की खातिर लोग बिगड़ैल मौसम की परवाह किए बगैर लाइनों में लगने को मजबूर हैं। मंगलवार को रात सवा दस बजे के बाद घने कोहरे से ढकीं सड़कों पर लगी लाइनें इसका सुबूत हैं। टाउनहाल-सदर बाजार रोड पर एसबीआई ब्रांच और पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के सामने एक्सिस बैंक के एटीएम आधी रात के बाद तक चलते रहे। खास यह है कि लाइनों में लगे सर्वाधिक लोग बॉब के खातेदार पाए जा रहे हैं।
बता दें कि जिले में विभिन्न बैंकों के 351 एटीएम हैं और इनमें से बॉब के सभी 68 एटीएम नोटबंदी के बाद से ठप हैं, जबकि इस बैंक को अग्रणी बैंक का तमगा हासिल है। एटीएम से मांग पूरी नहीं होने पर लोग बैंक शाखाओं की ओर भाग रहे, लेकिन वहां भी एक विड्राल पर 3000-4000 रुपये से अधिक स्वीकृत नहीं दिए जा रहे। कारपोरेशन बैंक कचहरी ब्रांच, एसबीआई चौक सिटी ब्रांच, विकास भवन की ग्रामीण बैंक आदि शाखाओं में कैश की कमी के कारण खातेदारों की मांग में कटौती करनी पड़ी।
मकसूदापुर/ बंडा। मकसूदापुर की बॉब शाखा में कई दिनों से कैश नहीं मिलने से बुधवार को ग्रामीणों ने बंडा-बिलसंडा मार्ग पर जाम लगाकर प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर पुतला फूंका। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने कैश लाकर बंटवाने का आश्वासन देकर बमुश्किल जाम खुलवाया। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि मकसूदापुर की बैंक ऑफ बड़ौदा में लगभग दस दिनों से भुगतान नहीं किया जा रहा है। लोग रोज बैंक पहुंचते हैं, लेकिन कैश नहीं आने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है। बुधवार को भी लोगों को रटा रटाया जबाव मिला तो वह भड़क गए और बंडा-बिलसंडा मार्ग पर जाम लगा दिया। तीन घंटे तक लगे रहे जाम की जानकारी पाकर कार्यवाहक एसओ सुनील सिंह मौके पर पहुंचे और कैश लाकर बंटवाने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। जाम के दौरान लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का पुतला दहन किया। इसके बाद बैंक मैनेजर के साथ पुलिस बिलसंडा पहुंची और छह लाख रुपये लेकर मकसूदापुर आई। देर शाम लोगों को थोड़ा-थोड़ा भुगतान किया गया। इस संबंध में बैंक के मैनेजर राजकुमार आनंद ने बताया कि कई दिनों से कैश नहीं मिलने के कारण समस्या हुई है। अगर बैंक को कैश मिलता रहे तो उन्हें भुगतान करने में समस्या क्यों होगी।
बैंक मैनेजर पर अभद्रता का आरोप
चांदपुर/खुटार। गांव हरनहाई के विनोद यादव ने डीएम को भेजे पत्र में बताया कि बुधवार को वह गांव में ही बॉब शाखा पर भुगतान लेने के लिए गए थे। इस दौरान उन्होंने पांच सौ रुपये का विड्राल भरा तो कैशियर ने रुपये निकालने से मना कर दिया। बैंक के मैनेजर के पास शिकायत लेकर गए तो उन्होंने पासबुक को फाड़कर फेंक दिया और अभद्रता की। विनोद कुमार ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई कराए की मांग की है। इस संबंध में बैंक मैनेजर शशिकांत सिंह का कहना है कि मैंने किसी के साथ अभद्रता नहीं की है। बैंक में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिसकी फुटेज देखने में पता लग जाएगा।
बैंकों में मारामारी, भटक रही पब्लिक बेचारी
पुवायां। कई घंटे तक लाइन में लगने के बाद कहीं कैश खत्म, कहीं दिन की शुरुआत से ही कैश खत्म होने की सूचना तो नगर में लगे आधा दर्जन से ज्यादा एटीएम भी खाली। इस तरह के हालातों से पुवायां क्षेत्र के लोग काफी परेशान हैं। कारण है कि अधिकारियों के ध्यान नहीं देने से बैंक कर्मचारी मनमानी से काम करने पर उतारू हैं। इससे लोगों में रोष पनप रहा है।
नोट बंदी के तुरंत बाद बैंक खुलने पर पुवायां क्षेत्र में काम ठीक ठाक चलता रहा, लेकिन जैसे दिन बीतते गए तो पुवायां क्षेत्र के लोगों की रुपयों को लेकर पैदा हो रही मुसीबत बढ़ती ही जा रही हैं। लोग रुपयों के लिए बैंक में लगी लाइनों में लग जाते है तो तमाम लोगों का नंबर आने तक कैश ही खत्म हो जाता है। इसके अलावा भी जिन लोगों को ज्यादा पैसे की जरूरत है तो उन्हें घंटों लाइन में लगने के बाद सिर्फ दो हजार का एक नोट दे दिया जाता है, इससे लोगों को निराशा हाथ लगती है। बुधवार को नगर की स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में कैश खत्म होने की सूचना चस्पा कर दी गई तो डाकघर के पास एसबीआई में प्रति व्यक्ति को दो हजार रुपए ही दिए गए। नगर के कई एटीएम कैश नहीं होने के कारण बंद रहे तो एकमात्र एचडीएफसी के एटीएम पर रुपये निकलने पर वहां दिन भर काफी लंबी कतार रही। लोगों का कहना है कि बैंकों में गोलमाल करके भुगतान किया जा रहा है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देकर व्यवस्थाएं सही करानी चाहिए।