जिला विद्यालय निरीक्षक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनके निलंबन की मांग को लेकर शिक्षक विधायक संजय कुमार मिश्र ने बुधवार सुबह दस बजे से कलक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके साथ बड़ी संख्या में वित्तविहीन कॉलेज के शिक्षक भी अनशन पर बैठे, देर शाम डीएम के आश्वासन पर अनशन खत्म कर दिया गया।
अनशन स्थल पर हुई सभा में शिक्षक विधायक ने डीआईओएस डॉ. केएल वर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने जनपद में आते ही विद्यालयों में ताबड़तोड़ छापे मारकर वसूली शुरू कर दी है। बोर्ड परीक्षा निर्धारण में शासनादेश का खुला उल्लंघन करते हुए उन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया, जो मानक पर खरे नहीं उतर रहे। जो कॉलेज मानक पूरा कर रहे हैं, उन्हें वंचित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि डीएम ने डीआईओएस को गनर उपलब्ध कराकर साबित कर दिया है कि वह डीआईओएस को संरक्षण दे रहे हैं। विधायक ने मांग की कि डीआईओएस को निलंबित किया जाए और वंचित कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए। आमरण अनशन में विनोद शुक्ला, सतीश चंद्र मिश्र, आशीष पांडेय, अमरपाल सिंह, हरीशंकर श्रीवास्तव, उमेश पाल सिंह, सुरेश गंगवार भी शामिल रहे। लेकिन शाम साढ़े सात बजे डीएम ने अनशन स्थल पर पहुंचकर शिक्षक विधायक मिश्र को मना लिया। हालांकि मिश्र का कहना था कि वह अपनी मांगों पर कायम हैं और इस संबंध में कार्रवाई न होने पर बीस दिसंबर से फिर बेमियादी अनशन कर सकते हैं।
इस दौरान वित्तविहीन शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह यादव, रेनू मिश्रा, सुधीर पाल सिंह, प्रमोद कुमार, रजनीश मिश्र, सुनील कुमार, धर्म सिंह, अवनीश कुमार, सरोज कुमार, अमितेश कुमार, देवशरण मिश्र, यज्ञदत्त शर्मा, अनूप यादव, कृष्ण स्वरूप मिश्र, संत कुमार सिंह, मनोज शुक्ला, नत्थू लाल, रामा शर्मा, नीलम श्रीवास्तव, मनोज अवस्थी, राधा रानी, विनीता, ज्योति शर्मा, पूनम कश्यप समेत बड़ी संख्या में शिक्षक यहां मौजूद रहे।
जो डिफाल्टर थे, उन्हें नहीं बनाया केंद्र
जो केंद्र डिफाल्टर रहे हैं या जिनके बारे में छात्रवृत्ति घोटाला जैसी शिकायतें मिली थीं, उनकी जांच कराई गई। जहां शिकायतें सही पाई गईं, उन विद्यालयों को केंद्र नहीं बनाया जा सका। इतना ही नहीं, कुछ विद्यालयों ने परीक्षा केंद्र नहीं बनाने के लिए भी लिखकर दिया। यदि उन्हें केंद्र नहीं बनाया गया तो वह कोर्ट जाकर अपने कॉलेज को केंद्र बनवा सकते थे। समझ में नहीं आ रहा है कि शिक्षक विधायक किस बात पर नाराज हो गए। यदि उन्हें लगता है कि मैंने गलत किया है तो वह शासन स्तर पर इन कॉलेजों की जांच करा सकते हैं। उन्हें ऐसे आरोप नहीं लगाने चाहिए। - डॉ. केएल वर्मा, डीआईओएस शाहजहांपुर