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शाहजहांपुर में दर्दनाक हादसा: पंखे में उतरे करंट से दंपती की मौत, पांच मासूम बच्चे हुए बेसहारा

Sat, 04 Jul 2026 11:09 AM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

जलालाबाद थाना क्षेत्र के कसारी गांव में शुक्रवार रात दर्दनाक हादसा हुआ। गांव में करंट लगने से पति-पत्नी की मौत हो गई। यह हादसा कमरे में रखे पैडस्टल पंखे में करंट उतरने से हुआ। दंपती की मौत से पांच बच्चे बेसहारा हो गए हैं।
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दंपती का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शाहजहांपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र में रामगंगा नदी की कटरी में बसे कसारी गांव में शुक्रवार रात घर के कमरे में फर्राटा (पैडेस्टल) पंखे में उतरे करंट की चपेट में आकर अमर सिंह (40 वर्ष) और उनकी पत्नी कुसुमा देवी (37 वर्ष) की मौत हो गई। हादसे के बाद दंपती के पांच बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

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गांव के सिकदार के पांच बेटों में सबसे छोटे अमर सिंह पत्नी कुसुमा देवी और पांच बच्चों के साथ राजस्थान में एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करके परिवार का भरणपोषण करते थे। दस दिन पहले वह अपने परिवार के साथ गांव आए थे। शुक्रवार रात करीब नौ बजे खाना खाने के पति-पत्नी घर में बने कमरे में चले गए जबकि उनके बच्चे कमरे के सामने पड़े छप्पर के नीचे लेटकर सो गए। 
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उस दौरान दंपती का बड़ा बेटा नितिन पापा का मोबाइल चला रहा था। नितिन ने बताया कि बिजली आने पर कमरे में रखा फर्राटा पंखा चलने लगा। कुछ देर बाद पंखे के गिरने की आवाज के साथ पिता की चीख सुनाई दी तो वह घबराकर जोर-जोर से रोने लगा।

चारपाई पर पड़े मिले दंपती 
नितिन का रोना सुनकर पास में ही रह रहीं उसकी ताई सोनी वहां पहुंच गईं। सोनी ने बताया कि कमरे में अमर सिंह और बहू कुसुमा दोनों चारपाई पर पड़े हुए थे। उन्होंने कुसुमा को उठाने का प्रयास किया। इसी दौरान उन्हें भी करंट का झटका लगा, लेकिन वह किसी तरह बच गईं। तभी लाइट चली गई। वह शोर करते हुए बाहर की ओर भागीं। 

घटना के बाद कमरे में जमीन पर पड़ा पंखा - फोटो : संवाद
वहां अन्य परिजन पहुंच गए। गांव के किसी युवक ने हादसे की सूचना पुलिस को दी। प्रभारी निरीक्षक अरविंद चौहान भी गांव पहुंच गए। उन्होंने घरवालों की मदद से दंपती को सीएचसी पहुंचाया, लेकिन वहां जांच के बाद डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद से रो रहे दंपती के बच्चों को ढांढस बंधा रहे पास-पड़ोसी अपने आंसू रोक नहीं पाए।

पांच बच्चों से सिर से उठ गया माता-पिता का साया
दंपती अमर सिंह और कुसुमा देवी की मौत से उनके पांच बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। उनका सबसे बड़ा बेटा नितिन 12 साल का है। उससे छोटा विवेक दस साल, शोभित नौ साल, बेटी आरुषि सात साल की और सबसे छोटी बेटी संध्या पांच वर्ष की है। हादसे ने एक ही झटके में उन्हें अनाथ बना दिया। अब परिवार के अन्य सदस्य इन नासमझ बच्चों की परवरिश और उनके भरण-पोषण को लेकर फिक्रमंद हो उठे हैं। सिकदार की मौत के बाद उनके पांच बेटे आसपास अलग-अलग मकान बनाकर रहने लगे। 

अमर सिंह के पास उनके हिस्से की खेती योग्य करीब ढाई तीन बीघा जमीन थी। नदी के किनारे होने के कारण इस जमीन में पैदावार बहुत कम हो पाती है। इसीलिए कई साल पहले अमर सिंह परिवार सहित राजस्थान जाकर ईंट भट्ठे पर काम करने लगे। उनके भाई प्रेमचंद्र ने बताया कि वे सभी लोग मजदूरी आदि करके किसी तरह अपने परिवार चला रहे हैं। अमर की 80 वर्षीय मां अक्सर बीमार रहने के कारण पुत्रों पर आश्रित हैं, लेकिन अब दंपती के बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
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कमरे में बिजली वायरिंग कामचलाऊ होने से हुआ हादसा
इस हादसे की बड़ी वजह परिवार की लापरवाही मानी जा रही है। छोटे से जिस कमरे में हादसा हुआ, वहां बिजली वायरिंग की फिटिंग नहीं कराई गई है। अमर सिंह ने पूरे घर में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कामचलाऊ तरीके से बिजली के तार लगा रखे थे। हादसे वाले कमरे में लटकते बिजली के बोर्ड में फर्राटा पंखा का प्लग लगा था। कमरे में टीन का एक बक्सा और उससे सटी लोहे के पाइप वाली एक चारपाई भी पड़ी थी। उसी के पास फर्राटा पंखा लगा हुआ था। 

अमर सिंह की भाभी सीमा सहित अन्य घरवालों का अनुमान है रात करीब दस बजे बिजली आने पर चलना शुरू हुआ फर्राटा असंतुलित होकर किसी तरह चारपाई पर लेटे दंपती पर गिर गया और करंट लगने से दोनों के छटपटाने के दौरान पंखा टूटकर पास में ही गिर गया। बच्चों का रोना सुनकर सोनी भागती हुई कमरे में पहुंची तो वहां उन्हें पंखे का एक हिस्सा चारपाई पर और दूसरा नीचे जमीन पर पड़ा मिला। 

एसडीएम प्रभात राय ने बताया कि करंट की चपेट में आकर दंपती की मौत की सूचना मिलने पर जांच के लिए कसारी क्षेत्र के लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। यदि दंपती के पास खेती योग्य भूमि होगी तो उनके आश्रित बच्चों को प्रदेश सरकार की कृषक दुर्घटना बीमा योजना से पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
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