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क्रिकेट में चौके-छक्के लगाकर चमकना चाहती हैं शाहजहांपुर की बेटियां

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जीएफ कॉलेज में महिला क्रिकेट टीम का उत्साह बढ़ाती छात्राएं - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। भारतीय महिला क्रिकेट टीम अपने ऊम्दा प्रदर्शन के बलबूते देश की बेटियों में क्रिकेट के प्रति जुनून पैदा कर रही हैं। महिला विश्व कप में भारतीय टीम ने बेहतरीन खेलते हुए बांग्लादेश को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद भी बढ़ा दी है। लेकिन, जिले की बेटियों को संसाधनों के अभाव में क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिल पा रहा है। यहां के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राएं क्रिकेट खेलकर नाम रोशन करना चाहती हैं।
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पर, उन्हें अवसर न मिलने की वजह से उनकी प्रतिभा का एक तरह से गला घोंटा जा रहा है। अफसोस कि जिले में महिला क्रिकेट की एक भी टीम नहीं है। ऐसे में यहां की बेटियां कैसे मिताली राज और झूलन गोस्वामी बन सकेंगी। जिले में एसएस कॉलेज, आर्य महिला डिग्री कॉलेज और जीएफ कॉलेज जैसे प्रमुख महाविद्यालय हैं। यहां दाखिले के लिए मारा-मारी रहती है। प्रवेश पाने बाद छात्राओं को एनसीसी, रेंजर्स-रोवर्स, एनएसएस की गतिविधियों में शामिल होने के लिए फोकस किया जाता है।
इसी तरह विभिन्न तरह की खेल स्पर्धाओं जैसे- टेबिल टेनिस, हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन, खो-खो आदि में छात्राएं दम दिखाती हैं, लेकिन क्रिकेट टीम बनाने में दिलचस्पी नहीं दिख रही है। शोहरत और ग्लैमर के कारण लगभग हर व्यक्ति का पसंदीदा खेल क्रिकेट जनपद में पिछड़ता जा रहा। यहां पर पुरुषों की टीमें तो हैं, लेकिन लड़कियां क्रिकेट खेलती नजर नहीं आतीं। विभिन्न खेलों में अपना कॅरियर तलाश रहीं छात्राएं चाहती हैं कि वे भी क्रिकेट के मैदान पर चौके और छक्के लगाएं, लेकिन उन्हें प्लेटफार्म नहीं मिलने के कारण उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पा रही है।
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टीम नहीं बनीं तो क्रिकेट पीछे छूट गया
इंटर कॉलेज में पढ़ते समय खूब क्रिकेट खेला था। हर बार खेल दिवस पर क्रिकेट टीम बनाई जाती थी। उस टीम में मुझे जरूर शामिल किया जाता था। 12वीं पास होने के बाद महाविद्यालय में आने पर उम्मीद थी कि यहां क्रिकेट खेलने का मौका मिलेगा, पर छात्राओं के नहीं मिलने के कारण टीम नहीं बन सकीं। यदि मौका मिलगा तो क्रिकेट खेलकर कॉलेज और जनपद का नाम रोशन करने की तमन्ना है। -अंजलि कश्यप
क्रिकेट में हमें बहुत दिलचस्पी
क्रिकेट में हमें काफी दिलचस्पी है। आर्य कन्या इंटर कॉलेज में पढ़ते समय कई बार खेलने का मौका मिला था। उस समय प्रतिभा भी दिखाई थी। कॉलेज स्तर पर नहीं खेल सकने का मलाल है। महिला क्रिकेट टीम की स्मृति मंधाना समेत कई खिलाड़ी हमें काफी अच्छी लगती हैं। उनसे हम प्रेरित भी हैं। प्रयास रहेगा कि यदि टीम बने और खेलने को मिल जाएं तो बेहतर खेल का प्रदर्शन कर आगे बढ़ सकें। -केसर राना
झूलन स्वामी है रोल मॉडल
लॉन टेनिस के खिलाड़ी होने के बावजूद इंडिया की पुरुष और महिला टीम का कोई भी मैच हमसे नहीं छूटता है। हमें झूलन गोस्वामी काफी अच्छी खिलाड़ी लगती हैं। वह हमारी रोल मॉडल है। अन्य खेलों की तुलना में क्रिकेट एक शानदार खेल है। इसमें काफी संभावनाएं हैं। इस खेल में कॅरियर भी बहुत से लोगों ने बनाया है। अफसोस की बात है कि जनपद में महिलाओं के लिए क्रिकेट की टीम नहीं है। -निशा
लखनऊ में खूब लगाते थे चौके-छक्के
जनपद में आने से पहले लखनऊ के केवी-टू में इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण की है। वहां पर लड़कियां स्टेडियम में खूब क्रिकेट खेलती थीं। हम भी उनके साथ क्रिकेट खेले हैं। हालांकि, कभी किसी टीम के साथ लखनऊ से बाहर जाने का मौका नहीं मिला। यहां आने के बाद क्रिकेट खेलने की चाहत खत्म हो गई। गेंद और बल्ले को देखकर शरीर के अंदर ऊर्जा का संचार हो जाता है। यदि मौका मिले तो कुछ बेहतर कर सकते हैं। -खुशी
घर में हैं बैट-बॉल, मन होता है तो खेलते हैं
टेबल टेनिस की खिलाड़ी होने के बावजूद क्रिकेट को लेकर काफी दिलचस्पी है। घर में बैट और बॉल दोनों रखे हैं। पढ़ाई के बाद जब भी समय मिलता है। क्रिकेट खेलकर अपना समय व्यतीत करते हैं। काफी तमन्ना है कि कॉलेज स्तर पर टीम बन जाएं तो कॅरियर की राह आसान हो जाए। क्रिकेट में हम कैफ की तरह क्षेत्ररक्षण काफी बेहतर करते हैं। बस एक मौके की तलाश है। उम्मीद है कि कॉलेज स्तर से टीम बनाई जाएगी। -आशी वैश्य
भाई के साथ खेलते हैं क्रिकेट
हमारा भाई फाइक खान क्रिकेटर है। उसके साथ क्रिकेट खेलते हैं। हर रोज एक से दो घंटे तक अभ्यास करते हैं। क्रिकेट खेलने से काफी स्वस्थ रहते हैं। गली की लड़कियां और रिश्तेदारों के साथ क्रिकेट खेलने में काफी अच्छा लगता है। इंटरमीडिएट तक क्रिकेट खेला। सोचा था कि कॉलेज में खेलने का मौका मिलेगा। यहां टीम न होने से मायूसी हाथ लगी है। प्रबंधतंत्र को छात्राओं की रुचि को ध्यान में रखकर टीम बनानी चाहिए। -इल्मा खान
क्रिकेट खेलने का बहुत मन करता है
महिला क्रिकेट टीम में कई ऐसे नाम हैं, जो बुलंदियों को छू रहे हैं। क्रिकेट में काफी अच्छा कॅरियर है। दिल्ली में रहने के दौरान खूब क्रिकेट खेले। भाइयों और बहनों के साथ पूरी टीम बना रखी थी, लेकिन जनपद में आने के बाद खेलना बंद हो गया। क्रिकेट खेलने का बहुत मन करता है। खेल के जरिये सरकारी सेवा में भी जा सकते हैं। इसलिए क्रिकेट हमारी पहली पसंद है। सभी लड़कियों को क्रिकेट में दिलचस्पी लेनी चाहिए। -तैयबा नाज
लड़कियों की टीम होनी चाहिए
क्रिकेट में काफी ज्यादा चमक-दमक है। साथ ही उसमें मेहनत भी काफी ज्यादा है। महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, स्मृति मंधाना और मिताली राज आदि के नाम पूरे विश्व में चमक रहे हैं। चूंकि, लड़कियों को उस स्तर पर खेलने का मौका नहीं मिल पाता है। जिला स्तर से लेकर कॉलेज तक कोई टीम नहीं बनी है। इसके चलते छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पाता है। लड़कियों की क्रिकेट टीम भी बननी चाहिए। -नूर आलिया
क्रिकेट पूरे दिन का गेम होता है। इसकी टीम के लिए छात्राएं नहीं मिलती हैं। एक घंटा खेल में पसीना बहाने के बाद छात्राओं को घर जाने की जल्दी होती है। फिर भी छात्राओं में काफी प्रतिभा है। ऐसे में प्रयास करेंगे कि छात्राओं को एकत्रित कर उनकी क्रिकेट टीम बनाई जाए। कॉलेज स्तर से इस ओर भी कदम उठाया जाएगा। - डॉ. फैयाज अहमद, क्रीड़ा सचिव, जीएफ कॉलेज
लड़कियों की क्रिकेट टीम नहीं बन पाई है। हर वर्ष ट्रायल के लिए नोटिस निकालते हैं। लड़कियों से क्रिकेट के खेल में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं। उसके बावजूद टीम के लिए छात्राएं नहीं मिल पाती हैं। छात्राएं यदि खेलना चाहती हैं तो उनके लिए टीम बनाकर मौका दिया जाएगा। -डॉ. अजीज चारग, क्रीड़ा सचिव, एसएस कॉलेज
हमारे कॉलेज में मैदान नहीं हैं। सबसे बड़ी दिक्कत मैदान नहीं होने के कारण आती है। कबड्डी, खो-खो, टेबिल टेनिस, बैडमिंटन आदि खेल बमुश्किल से हो पाते हैं, साथ ही छात्राएं भी क्रिकेट की टीम के लिए राजी नहीं होती हैं। इसके चलते कॉलेज में टीम नहीं बन पाई है। -अनुराधा, प्रभारी क्रीड़ा सचिव, आर्य महिला डिग्री कॉलेज।
-जनपद में महिला की क्रिकेट टीम नहीं बन सकी है। दरअसल, लड़कियां क्रिकेट में दिलचस्पी नहीं लेती हैं। इसके चलते उनकी टीम बनाना संभव नहीं हो सका। क्रिकेट खेलने की इच्छुक छात्राएं स्पोर्ट्स स्टेडियम आकर इच्छा जाहिर करती हैं तो उनकी टीम को तैयार करा खेल के टिप्स सिखाए जाएंगे। अभी हमारे यहां कैंप नहीं चल रहा है। कैंप शुरू होने के बाद लड़के और लड़कियां खेलना शुरू करेंगी। -जितेंद्र भगत, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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