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समर एक्सप्रेस: इस बार अप्रैल में आसमान से बरसेगी मई-जून जैसी आग

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शाहजहांपुर। एक सप्ताह से जिस तेजी के साथ गर्मी बढ़ रही है, उसे देखते हुए अप्रैल में मई-जून जैसी झुलसाने वाली गर्मी पड़ने के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिक भी मानते हैं कि बीते वर्ष की तुलना में चालू मार्च माह में दिन और रात के तापमान में औसतन तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। यदि पारा इसी तरह उछलता रहा तो अप्रैल के पहले सप्ताह तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। बीते वर्ष इसी अवधि में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहा था।
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हर साल होली तक गुलाबी सर्दी का दौर जारी रहने से लोग सुबह-शाम गर्म इनर और आधी आस्तीन की जैकेट पहनकर बाहर निकलते थे। इस बार गर्मी ने अभी से तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इस वर्ष मार्च में गत वर्ष की तुलना में अधिकतम तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस का इजाफा हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ के शिथिल पड़ने और पछुआ हवा की गति मंद होने से बीती आठ मार्च के बाद से गर्मी तेजी से बढ़ने लगी।
दस मार्च को मतगणना के दिन वायुदाब में गिरावट आने पर सुबह से बादल छाए रहने और तेज गति से नम हवा चलने से अगले दिन अधिकतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस घटकर 30 डिग्री सेल्सियस हो गया था। बाद में मध्यम गति से हवा चलते रहने के कारण मौसम शुष्क होना शुरू हुआ और पारा बढ़ने लगा। बीते दिन अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।
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गेहूं का दाना हल्का पड़ने की बढ़ी आशंका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से तापमान बढ़ने और शुष्क हवा चलने का दौर जारी रहने की दशा मेें खेतों में पक रही गेहूं की फसल समय से पहले परिपक्व हो जाएगी। ऐसी स्थिति में बालियों में पड़ा दाना भी जल्दी पकने से हल्का पड़ने की आशंका है। इसकी वजह से प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन में भी कमी आ सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार गेहूं को समय से पहले पकने से बचाने के लिए पोटैशियम नाइट्रेट अथवा पोटैशियम सल्फेट का दस ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उसका एक-दो बार छिड़काव करना लाभकारी होगा। यह उपाय उन्हीं खेतों में कारगर होगा, जहां बालियां हरी हैं और अभी उनकी रंगत पीली नहीं पड़ी है।
आम का बौर फफूंदी और कीटों से बचाएं किसान
- गत फरवरी मेें दो बार हुई बेमौसम बरसात से वातावरण में नमी बढ़ी तो मार्च के पहले सप्ताह तक सर्दी बनी रहने से आम के तमाम पेड़ों पर बौर देर से आया। अब गर्मी बढ़ने के साथ बौर भी तेजी से फूल रहा है। पारा इसी तरह चढ़ता रहा तो उस पर फफूंदी और कीटों का हमला हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. एसके वर्मा का कहना है कि आम गर्मी के सीजन का फल है। इसलिए आम समय से आएगा और उसके फल को बढ़ते तापमान से कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन बौर की देखभाल जरूरी हो गई है। अधिक तापमान में कीट-रोगों की चपेट में आकर बौर खराब होने की आशंका है। इसलिए बागान मालिक कार्बेंडाजिम, मैंकोजेब, इमिडाक्लोर आदि कृषि रसायनों का आम के पेड़ों पर उचित मात्रा में छिड़काव करें।
तापमान में वृद्धि क्षेत्रीय कारणों से नहीं हो रही। इसे ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव माना जाना चाहिए। इसी वजह से मौसम चक्र बिगड़ रहा है। बीते वर्ष मानसून सीजन समय से पहले शुरू हो गया, लेकिन सर्दी की शुुरुआत देर से हुई। अब जिस तेजी से तापमान बढ़ रहा है, उसे देखते आने वाले दिनों में गर्मी नया रिकॉर्ड बना सकती है। राष्ट्रीय मौसम वेधशाला ने अप्रैल में गंगा के मैदानी क्षेत्रों में तापमान में कमी आने के संकेत दिए हैं, लेकिन ऐसी संभावना कम लग रही है।
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-डॉ. मनमोहन सिंह, मौसम वैज्ञानिक, गन्ना शोध परिषद
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