जब इंसानियत और मोहब्बत की रोशनी दिलों में हो तो जाति-धर्म, ऊंच-नीच की
बात अपने आप खत्म हो जाती है। दिखता है तो सिर्फ इंसानियत और भाईचारे का
जज्बा। होली पर कस्बे में ऐसी ही एक मिसाल कई दशकों से कायम है, जो आने
वाली पीढ़ियों को एकता का संदेश देने के लिए काफी है।
नगर के मोहल्ला
इमली में हिंदू और मुसलमान दोनाें मिलजुल कर होली के रंगों के बीच एक-दूसरे
के चेहरे पर मुस्कराहट देखनेको बेताब रहते हैं। यही वजह है कि कब्रिस्तान
की चहारदीवारी में दोनों समुदाय के लोग होली पर एक-दूसरे के गले लगकर
परस्पर सलामती की दुआ मांगते हैं।
आपसी भाईचारे की यह अद्भुत मिसाल
पिछले लगभग पांच दशकों से कायम है। इस भाईचारे की लौ जलाकर इंसानियत के
बगीचे को रोशन कर रहे है 55 वर्षीय मशहूद हसन खां उर्फ लाला। कब्रिस्तान के
मुतवल्ली लाला का कहना है कि उन्होंने अपने दादा अहमद हुसैन उर्फ मद्दू
खां द्वारा आजादी से पहले लगाये गए उस पौधे को सींचने की कोशिश की है, जो
समाज में मोहब्बत और भाईचारे की खुशबू फैला रहा है। आज जहां समाज में लोग
छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा फसाद करने पर आमादा हो जाते हैं तथा धर्म और जाति
का जहर बोकर नफरत की खेती करते हैं, वहीं कब्रिस्तान परिसर में ही लगभग 50
वर्षों से होलिका दहन होता चला आ रहा है।
लाला का कहना है कि 35
वर्षों से मुतवल्ली होने के नाते उनकी सहमति से मोहल्ले के लोग होली पर
कब्रिस्तान में हंसी-खुशी आकर आखत डालते हैं और दोनों समुदायों के लोग
मिलजुल कर एक-दूसरे की खुशी में शामिल होते हैं। झगड़ा और मनमुटाव तो सोचना
भी पाप है। लाला कहते हैं कि मुसलसल हो जिसका ईमान, वही तो सच्चा मुसलमान
है। जब तक वह जिंदा हैं, भाईचारे की परंपरा को कायम रखेंगे।
तिलहर
वास्तव मेें दिलहर है। यहां के लोगों की परस्पर भाईचारे, रचनात्मक सोच और
सहयोग की भावना बेमिसाल है। होली पर दोनों समुदायों के बीच कायम मिसाल दिल
को छू लेने वाली है।
- रूम सिंह यादव, कोतवाल
ईद की खुशियां हों
या होली के रंग, दीवाली के पटाखे या मोहर्रम का गम, सब मिल जुलकर एक साथ
बैठते हैं और दुख-दर्द में शामिल होते हैं। यही तो हमारी संस्कृति
है।
- फरीद्दउद्दीन गुड्डू, भाजपा नेता
होली
हमें मतभेद भुलाकर गले मिलना सिखाती है। अगर हिंदू-मुसलमान एक-दूसरे का
सहयोग करते हैं, तो इसमें बुरा क्या है। एक-दूसरे के त्योहारों में हिस्सा
लेने से प्रेम बढ़ता है।
- डॉ. प्रमोद मिश्रा, हिंदूपट्टी
मजहब व
जाति बिरादरी हमने बनाई है, अल्लाह ने नहीं। होली कब्रिस्तान में जलने से
हिंदू-मुस्लिम की नजदीकियां और बढ़ती हैं, जो त्योहार मनाने का असल
उद्देश्य है।
- इकबाल हुसैन उर्फ फूल मियां, कच्चा कटरा
हिंदू और
मुसलमानों को अलग-अलग ना पुकारो। हम कहो, यही तो तिलहर की तहजीब है। इस
तहजीब पर क्षेत्र का हर कोई व्यक्ति नाज करता है और सीख भी लेता है।
- साहू ओम प्रकाश, निजामगंज