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बच्चों को गिरफ्त में ले रहा कोराइजा और वायरल

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राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में एक स्ट्रेचर पर दो मरीज । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। तापमान में उतार - चढ़ाव और प्रदूषित पानी लोगों को बीमार कर रहा है। ऐसे में सबसे ज्यादा प्रकोप कोल्ड कोराइजा और वायरल बुखार का है, जिसका सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं। जिले में अब तक बुखार से कई बच्चों की जान जा चुकी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज रोज वायरल बुखार सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।
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मौसम में आर्द्रता की अधिकता और तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस होने से वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन फैलने का उपयुक्त माहौल है। डायरिया, पीलिया और मलेरिया के मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। आजकल राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में सबसे ज्यादा वायरल बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर 14 साल तक की उम्र के बच्चे हैं।
सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज के कमरा नंबर चार में करीब 114 बच्चों का इलाज किया गया। इनमें ज्यादातर मरीज वायरल बुखार से पीड़ित थे। इसके बराबर वाले एनिमिया कक्ष में डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। इसी तरह पर्चा काउंटर पर भी मरीजों की लंबी लाइन लगी थी।
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जानकार चिकित्सकों के मुताबिक कोल्ड कोराइजा, बैक्टीरियल इंफेक्शन, वायरल बुखार और ज्वाइंडिस के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं। डायरिया का प्रकोप भी बढ़ा है। इन बीमारियों की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं।
बेड फुल, एक स्ट्रेचर पर लिटाए जा रहे दो-दो मरीज
वायरल बुखार फैलने से राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ट्रामा सेंटर में बेड और स्ट्रेचर फुल होने पर मरीजों को जमीन पर लेटना पड़ रहा है। एक स्ट्रेचर पर दो-दो मरीजों को लिटाकर इलाज किया जा रहा है। कांट थाना क्षेत्र की रहने वाली मीरा के बेटे उत्तम को बुखार आने के साथ ही तेज झटके आने लगे। सोमवार को मीरा अपने बेटे को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर पहुंची। स्टाफ ने उनसे बेड फुल होने की बात कहकर उसे स्ट्रेचर पर लिटा दिया। उसी स्ट्रेचर पर एक मरीज पहले से लेटा था। निगोही क्षेत्र के कांतेपुर गांव निवासी मिश्रीलाल को कई दिन से बुखार आ रहा है। सोमवार दोपहर मिश्रीलाल मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर पहुंचे। वहां बेड न मिलने पर आधे घंटे तक जमीन पर लेटे रहे।
बुखार से इन बच्चों की जा चुकी है जान
जलालाबाद में शनिवार को दो साल की बच्ची की बुखार से मौत हो गई थी। इससे पहले शुक्रवार को छह साल की बच्ची ने हफ्ते भर तक बुखार आने के बाद दम तोड़ दिया था। रोजा क्षेत्र में तीन अगस्त को 12 साल के बच्चे की बुखार और डायरिया से मौत हो गई थी। दो अगस्त को कांट इलाके में दस साल की बच्ची की बुखार से मौत हो गई थी।
बरसात के मौसम में वायरल बुखार, डायरिया, हेपेटाइटिस पीलिया और बैक्टीरियल इंफेक्शन के मरीजों में खासा इजाफा हुआ है। खासतौर पर बच्चे सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं। अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बीमार बच्चे का घर पर इलाज कराने के बजाय तत्काल डॉक्टर को दिखाएं वरना बीमारी खतरनाक हो सकती है। - डॉ. रवि मोहन, वरिष्ठ चिकित्सक
वायरल एक साधारण बुखार होता है। सामाजिक दूरी न बनाने को लेकर ही हर साल इस तरह का वायरल फैल जाता है। एक-दूसरे के संपर्क में आने बीमारी बढ़ जाती है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है चेहरे पर मास्क लगाएं, सेनिटाइजर से हाथों को बार बार धोएं। इलाज में लापरवाही न बरतें। मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद हैं। - डॉ. राजेश कुमार, पीडियाट्रिशियन एवं प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज,
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