शाहजहांपुर। जिले में कोरोना संक्रमण के बीच वायरल फीवर ने हमला बोल दिया है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में इलाज के लिए मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। वायरल के साथ ही कई बीमारियों के मरीज पहुंचने से राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर सारे बेड फुल हो गए हैं। हालात यह हैं कि एक स्ट्रेचर पर दो-दो मरीज लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
अप्रैल में कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में मरीजों की संख्या बढ़ने पर मरीजों को जमीन पर लिटाया गया था। तब राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे थे। सोमवार दोपहर करीब एक बजे ट्रामा सेंटर में मरीजों की जबरदस्त भीड़ थी। ट्रामा सेंटर के अंदर से छत पर जाने वाली सीढ़ियों पर युवक लेटा था। जमीन पर लिटाकर उसका इलाज किया गया था। सीढ़ियों के पास एक स्ट्रेचर रखा था, जिस पर दो मरीजों को लटाया गया था।
गौरतलब यह कि बुखार के मरीज होने के बावजूद ट्रामा सेंटर में कोविड गाइडलाइन का पालन होता भी नजर नहीं आया। मरीज के साथ तीमारदार भी बगैर मास्क के दिखे। जिला अस्पताल की ओपीडी में भी सबसे ज्यादा मरीज वायरल बुखार के आ रहे हैं।
बेड नहीं मिला तो सीढ़ियों पर लिटा दिया मरीज
कांट कस्बे के मोहल्ला पट्टी पूर्वी निवासी छोटी बिटिया ने बताया कि उसके बेटे अमर को टीबी है। उसके सीने और पेट में अचानक दर्द होने लगा। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ट्रामा सेंटर लाने के बाद यहां बेड होने से इनकार कर दिया गया। गरीब हैं इसलिए प्राइवेट इलाज नहीं करा सकते। बेटे की हालत ज्यादा खराब है इसलिए सीढ़ियों पर लिटा दिया। उम्मीद है कि खाली होने पर उसके बेटे को बेड मिल जाएगा।
एक स्ट्रेचर पर दो-दो मरीजों का इलाज
ट्रामा सेंटर में सीढ़ियों के पास एक स्ट्रेचर रखा था। चार खंभा की रहने वाली युवती को स्ट्रेचर पर लिटाया गया। उसका इलाज भी शुरू कर दिया गया। इसी बीच मोहल्ला अजीजगंज की रहने वाली शीलू के सीने में दर्द उठा। परिजन शीलू को राजकीय मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर लाए। बेड न होने पर शीलू को उसी स्ट्रेचर पर लिटाया गया।
वायरल फीवर से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित
सोमवार को ओपीडी में महिलाओं समेत करीब 12 सौ मरीजों के पर्चे बने थे। इसमें सबसे ज्यादा बुखार, खांसी के मरीज थे। बच्चों की संख्या भी अच्छी खासी थी। ओपीडी परिसर में कमरा नंबर चार में डॉ. स्वर्णिम यादव और बृजेंद्र सिंह रावत बच्चों का इलाज कर रहे थे। डॉक्टरों ने कमरा नंबर चार में 110 बच्चों का इलाज किया। इनमें से अधिकतर वायरल फीवर से पीड़ित थे। कमरे के बाहर डॉक्टरों से मिलने के लिए मरीजों और उनके तीमरदारों की लाइन लगी हुई थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बृजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सिर में दर्द, जोड़ों में दर्द, सिर का तेज गरम होना, अचानक से तेज बुखार आना, खांसी या उल्टी आना, आंखों का लाल हो जाना ये सब वायरल बुखार के लक्षण हैं। अभिभावक सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लें। घरेलू इलाज से बचना चाहिए।