आसपास के लोगों ने उन्हें संभाला। रमेश ने खुद देवेश के परिवार के अन्य सदस्यों को फोन लगाकर बात की। पता चला कि वह दूल्हे की गाड़ी में सवार दूल्हे समेत पांच लोगों की मौत हो गई। रमेश के घर पर खबर पहुंची तो मंगलगीत की जगह पर चीख-पुकार मच गई। डीजे को भी बंद करा दिया गया। शादी-समारोह में शिरकत करने आए लोग भी बिना खाना खाए लौट गए।
कर्ज लेकर बेटी की बरात का किया था इंतजाम
रमेश चंद्रा का इकलौता बेटा धर्मवीर अभी छोटा है। उनके परिवार में पांच बेटियां हैं। रमेश की कमाई से घर का खर्च पूरा होता था। बेटी रिमना की बरात के लिए उन्होंने कर्ज लेकर तैयारियां की थी। 70 बरातियों समेत 250 लोगों का खाना बनवाया था। बरात चलने से पहले शाम करीब साढ़े छह बजे देवेश के भाई नरवीर से उनकी बात हुई थी। उन्होंने जल्द ही पहुंचने की बात कही थी। लेकिन, दूल्हे, उसके पिता समेत पांच लोगों की मौत के बाद रमेश के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
घर के बाहर लगी भीड़, गांव में पसरा सन्नाटा
आमतौर पर हमेशा अभायन गांव में चहल-पहल रहती है, लेकिन शनिवार को गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था। सिर्फ रमेश के घर के बाहर ही भीड़ लगी थी। उनके दुख में शामिल होने के लिए लोग पहुंच रहे थे। उन्हें सांत्वना दे रहे थे। रमेश के घर के अंदर भी सन्नाटा पसरा था। रिमना को भी लोग समझाने में जुटे थे।