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राजकाज में अंग्रेजी और उर्दू का बोलबाला

Sun, 13 Sep 2015 11:58 PM IST
शाहजहांपुर।
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हर साल हिंदी दिवस पर सरकारी विभाग हिंदी सप्ताह और पखवाड़ा मनाकर मातृभाषा का ढोल पीटते हैं, लेकिन बाद में उनका नियमित कामकाज पुराने ढर्रे पर शुरू हो जाता है। राजभाषा और राष्ट्रभाषा के बीच झूल रही हिंदी को विभिन्न सरकारी विभाग कामचलाऊ दर्जा देकर अन्य भाषाओं को अपनाए हैं। बैंकों के नियमित कामकाज में अंग्रेजी को आज भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसी तरह न्यायिक क्षेत्र और राजस्व विभाग के अधिकारी अंग्रेजी समेत उर्दू में पत्राचार करते हैं। इन विभागों में उर्दू और फारसी के शब्दों को सरकारी कामकाज में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सरकारी सेक्टर में हिंदी की स्थिति का आकलन करने पर यही निष्कर्ष सामने आया।
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साहबों की जुबान को ढो रहा इंगलिश ऑफिस
कलक्ट्रेट के कार्यालयों में भले ही हिंदी में सारा काम होता हो, अंग्रेजी साहबों की भाषा बनी हुई है। इसलिए अंग्रेजों के जमाने से कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी कार्यालय के पास इंगलिश ऑफिस बाकायदा चल रहा है। अधिकारी कहते हैं कि यह व्यवस्था शासन के निर्देश पर दशकों से चली आ रही है और इंगलिश ऑफिस के तमाम काम हिंदी में होने लगे हैं। जिला विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश त्रिपाठी के अनुसार विकास भवन के सभी कार्यालयों में हिंदी ही छाई है। अंग्रेजी में कोई पत्र मिलने पर विकास विभाग के कर्मचारी उसे पढ़ने-समझने में भी कठिनाई अनुभव करते हैं।
पखवाड़ा मनाकर हिंदी भूल जाता है दूरसंचार विभाग
भारत संचार निगम लिमिटेड हर साल 14 सितंबर से हिंदी पखवाड़ा मनाकर 15 दिन तक राजभाषा की दुंदुभि बजाता है और बाद में उसे दूसरी पायदान पर डालकर अंग्रजी में रोजमर्रा का कामकाज शुरू कर देता है। दूरसंचार क्षेत्र के सारे अनुबंध अंग्रेजी में होते हैं। टेलीफोन बिल भी इसी भाषा में जारी हो रहे हैं। हालांकि, हिंदी अधिकारी सुमन गिरि कहते हैं कि हिंदी पखवाड़ा के विविध आयोजनों से विभागीय कर्मचारियों में हिंदी को अपनाने की ललक जागी है।
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बिजली महकमे के तमाम काम अंग्रेजी पर आश्रित
पॉवर कारपोरेशन में हिंदी दिवस के कोई मायने नहीं। इसदिन विभाग स्तर पर ऐसा कोई आयोजन नहीं होता कि कर्मचारी हिंदी के प्रति प्रेरित हों। सारे कार्य आदेश अंग्रेजी में वर्क आर्डर के नाम से जारी हो रहे हैं। निविदा प्रक्रिया के कागजात भी इसी भाषा में तैयार होते हैं। बिजली के बिलों का अभी हिंदीकरण नहीं हो पाया है। इस तरह विभाग के लगभग 30 प्रतिशत राजकाज में अंग्रेजी का दखल है। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय के अनुसार करीब 20 प्रतिशत जेई लॉग बुक अंग्रेजी में भरते हैं।
राजस्व विभाग में हिंदी पर भारी पड़ रही उर्दू
राजस्व विभाग में अंग्रेजी का वर्चस्व नहीं है, लेकिन बात सरकारी काम की करें तो हिंदी पर उर्दू भारी पड़ रही है। यही नहीं, नई पीढ़ी के कर्मचारियों को ब्रितानी पीरिएड से राजस्व अभिलेखों में इस्तेमाल होने वाले फारसी के शब्द परेशान कर रहे हैं। इंतखाब, खसरा, खतौनी, अमल दरामद, दाखिल खारिज जैसे शब्दों का हिंदी भावानुवाद गांव-गिराव के कम पढ़े लोग भले न समझते हों, उदू्र के माध्यम से बोध कराने वाली विभागीय प्रक्रियाएं भली-भांति समझते हैं। तहसीलदार ओंकार नाथ वर्मा के अनुसार उर्दू संबंधी कामकाज के लिए अनुवादक नियुक्त हैं, लेकिन कर्मचारियों को दिक्कत तब होती है, जब सेना और केंद्र सरकार से जारी उच्चस्तरीय पत्र अंगे्रजी में प्राप्त होते हैं।
अंग्रेजी में भरे जा रहे रोडवेज के मार्ग पत्र
अंग्रेजी के प्रयोग की दृष्टि से परिवहन निगम भले ही पिछड़ा हो, अधिकांश परिचालक अपने मार्ग पत्र अंग्रेजी में ही भरकर कैश काउंटरों पर पहुंचते हैं। परिचालकों के बीच मार्ग पत्र अंग्रेजी में वे बिल के तौर पर बहु प्रचारित हैं। हालांकि, रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरके वर्मा का कहना है कि विभाग के सारे कामों का हिंदीकरण हो चुका है।
अंग्रेजी में आते हैं रेलवे के सर्कुलर
रेलवे विभाग में अधिकांश काम अंग्रेजी में होते हैं। विभाग की ओर से आने वाले सर्कुलर अंग्रेजी में आते हैं। टिकटों का रिजर्वेशन, स्टेशन पर लगने वाला चार्ट आदि भी अंग्रेजी में लगाया जाता है। यह जानकारी देते हुए नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के शाखाध्यक्ष ओमशिव अवस्थी ने कहा कि रेलवे में हिंदी में कार्य करने को बढ़ावा भी दिया जा रहा है, लेकिन अधिकारिक कार्य अंग्रेजी में ही होते हैं।
आर्मी में ज्यादातर होता अंग्रेजी का प्रयोग
सेना में आने वाले अधिकांश आदेश पारित करने में अंग्रेजी का प्रयोग होता है। यह बताते हुए सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल बलजीत सिंह ने बताया कि कई बार आदेशों को हिंदी में भेजते हैं तो उसे कंप्यूटर में हिंदी में कन्वर्ट करने में परेशानी होती है। बताया कि हिंदी दिवस पर सारा कार्य हिंदी में करने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।
हिंदी के साथ कब तक होगा अन्याय?
हिंदुस्तान में हिंदी की उपेक्षा से खुदागंज के वरिष्ठ नागरिक ओंकार मिश्र बेहद आहत हैं। उन्होंने सवाल किया कि जापान को जापानी, रूस का रशियन, चीन को चीनी भाषा पर गर्व है। इन देशों के लोग अतिथि का स्वागत अपनी मातृभाषा में करते हैं। संसद वहां की भाषाओं को अपनाए हैं। यहां तक कि नेपाल जैसा छोटा देश नेपाली प्रयोग करता है तो हिंदुस्तानी होकर हिंदी के साथ हम अन्याय क्यों कर रहे हैं?
श्री मिश्र ने दक्षिण भारत के अहिंदी भाषी घर में जन्मे जस्टिस कृष्णा स्वामी अय्यर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वह अखिल भारतीय भाषाओं के लिए कोई एक लिपि आवश्यक बताते हैं तो वह केवल देवनागरी हो सकती है। देश की शीघ्र उन्नति के लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना होगा।
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