नीली टी-शर्ट में परमजीत और रवि कुमार। (फाइल फोटो)
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शाहजहांपुर। अच्छे-बुरे वक्त में दोस्त के साथ मजबूती से खड़ा रहना, खुद शोहरत पाकर भी साथी की चिंता करना, यही अच्छी दोस्ती की निशानी है। नेशनल लेवल पर फुटबॉल खेल रहे रवि कुमार और परमजीत सिंह दोस्ती की ऐसी ही मिसाल हैं। रवि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रयासरत है वहीं परमजीत नेशनल टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक-दूसरे को ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए जब जरूरत हुई, दोनों दोस्त एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े नजर आए। अपनी-अपनी कामयाबी का श्रेय भी एक-दूसरे को देते हैं।
फुटबॉल खिलाड़ी प्रेमजीत चिनौर के रहने वाले हैं और रवि कुमार गदियाना मोहल्ले के। दोनों की मुलाकात पहली बार 2004 में ओसीएफ मैदान में फुटबॉल मैच के दौरान हुई थी। वक्त के साथ दोस्ती गाढ़ी होती चली गई। रवि गोलकीपर हैं और प्रेमजीत स्ट्राइकर। साथ में खेलना तो होता ही था मगर दिल इतने जुड़ चुके थे कि एक-दूसरे के मुश्किल वक्त में हमेशा साथ खड़े नजर आते थे।
परमजीत बताते हैं कि 2012 में पुणे फ्रेंचाइजी में उनका सेलेक्शन हो गया था। महंगे जूतों की जरूरत थी लेकिन उस वक्त उसके पास उपलब्ध नहीं थे। नेशनल लेवल पर खेलने का सपना जब टूटता दिख रहा था तो ऐसे समय में रवि आगे आए। पांच-छह हजार रुपये के स्पोर्ट्स शूज रवि ने अपने पास से खरीदकर दिए। आज भी रवि हर संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहता है।
रवि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का प्रयास कर रहा है। वह इंडियन सुपर लीग में ओडिसा फ्रेंचाइजी का अहम हिस्सा रह चुका है। परमजीत कहते हैं कि रवि भले ही फुटबॉल के राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रहा है लेकिन उनकी दोस्ती में कोई कमी नहीं आई है।
परमजीत मानते हैं कि उन्होंने कई बार रवि की गाढ़े वक्त में मदद की है लेकिन वह इसे बताना नहीं चाहते। परमजीत अब राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करना चाहते हैं। इसमें रवि साजोसामान के साथ ही फुटबॉल से जुड़ी उन जरूरी चीजों को साझा करता रहता है जो वहां तक पहुंचने के लिए जरूरी हैं। दोनों दोस्त अपनी कामयाबी के पीछे अपनी दोस्ती का बड़ा हाथ मानते हैं। संवाद