यह है गढ़ी का इतिहास
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि ईसा पूर्व छठवीं सदी में यह प्राचीन अहिच्छत्र जनपद के अंतर्गत स्थित गढ़ी थी। यहां अभी तक अहिच्छत्र और कुषाणकालीन सिक्के बहुतायत में मिलते रहे हैं। इस टीले की ओर सबसे पहला ध्यान संयुक्त प्रांत के पहले पुरातात्विक महानिदेशक एए फ्यूहरर ने आकर्षित किया था। उन्होंने इसके उत्खनन के लिए वर्ष 1892 में पहल भी की थी, लेकिन योजना को मूर्तरूप नहीं मिल सका।
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शाहजहांपुर के ब्रिटिश कालीन गजेटियर में इसे चीन-भारत यात्रा मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव बताता है। यहां तक कि मशहूर चीनी यात्री फाहियान ने अपने यात्रा वृतांत में यहां स्थित एक बड़े बुद्ध विहार का उल्लेख किया है। 12वीं सदी में यह स्थान विख्यात कठेरिया राजपूत पीठ के रूप में स्थापित हो गया था।