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क्षमा से होता अभिमान का नाश : आचार्य दामोदर

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शाहजहांपुर। चित्रा टॉकीज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास डॉ.आचार्य दामोदर दीक्षित ने सुनाया कि काम का नाश भगवान के नाम से, अभिमान का नाश क्षमा से तो कृपणता का नाश दान से होता है। पुत्रेष्णा, लोकेष्णा, वित्तेष्णा से मुक्ति का मार्ग हमें ग्रंथों से मिलता है।
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उन्होंने कहा कि परमात्मा ने सभी को तीन चीजें दीं। समय, शक्ति और संपत्ति इनके सदुपयोग और दुरुपयोग में कर्ता स्वतंत्र है। सदुपयोग करने वाले महापुरुष कहलाते हैं और दुरुपयोग करने वाले दुष्ट कहलाते हैं। भगवान को अपना बनाने के लिए कोई संबंध बना लेना चाहिए।
कथाव्यास ने हिरण्यकश्यपु और गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाई। इससे पूर्व सर्वप्रथम खन्ना परिवार के पुरोहित अनंतराम ने देव पूजन कराया। कार्यक्रम का श्रीगणेश पंडित रमेश त्रिपाठी, प्रसून त्रिपाठी और रामवाली ने हनुमान चालीसा का पाठ कर किया। रामदुलारे त्रिगुनायत ने अयोध्या कांड और पीलीभीत से आए शिवकुमार सुमन ने किश्किंधा कांंड सुनाया। संचालन आचार्य रामानंद दीक्षित ने किया। मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना, ध्रुवनारायन मेहरा, सुधा मेहरा, सोमनाथ कपूर, सरिता कपूर, जयप्रकाश खन्ना व चंद्र शेखर खन्ना आदि मौजूद रहे। संवाद
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