शाहजहांपुर में शक्ति पौधशाला में पौधों की गुड़ाई कराते फारेस्टर सुशील कुमार। स्रोत: वन विभाग
भावलखेड़ा। वन विभाग ने घरों में किचन गार्डन बनाकर प्रकृति संरक्षण की अनूठी पहल शुरू की गई है। इस बार जुलाई में होने वाले वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र के लोगों को कलम से तैयार किए गए संतरा, मौसमी, नींबू, आंवला, अनार आदि फलदार पौधे भी वितरित किए जाएंगे।
ग्रामीण अंचलों के लोग भी इन्हें ले सकते हैं। पौधों को गमलों में भी लगाया जा सकता है। प्रति वर्ष जुलाई में होने वाले वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में इस बार शहरी क्षेत्र के घरों और ग्रामीण इलाकों की चौपालों में हरियाली करने की योजना वन विभाग ने बनाई है। वन विभाग की सदर रेंज में स्थित शक्ति पौधशाला में कलम से संतरा, आंवला, मौसमी, नींबू, अनार की पौध तैयार की गई हैं। इन्हें उचित संवर्धन कर गमलों में लगाकर शहरी क्षेत्र के लोग किचन गार्डन तैयार कर सकते हैं।
इसके अलावा पौधे ग्रामीण इलाकों में चौपालों और बाग में उगाकर शोभा बढ़ा सकेंगे। लोग वन विभाग से संपर्क कर जुलाई में पौधों को प्राप्त कर सकते हैं। संवाद
पापुलर और यूकेलिप्टस का विकल्प बन सकता है कैजुराइना
-फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ देहरादून (एफआरआई) के सहयोग से वन विभाग ने प्रायोगिक तौर पर सदर रेंज के गांव रायखुर्द में एक हेक्टेयर भूमि पर कैजुराइना के 1500 पौधे लगाए हैं। एफआरआई की टीम समय-समय पर आकर इनका परीक्षण करती है। कैजुराइना की विशेषता है कि यह यूकेलिप्टस और पापुलर की अपेक्षा लंबाई में दोगुना होता है। इसकी जड़ें नदी किनारे कटान रोकने का कार्य भी करती हैं। किसान इस पेड़ को लगाकर आय बढ़ा सकते हैं। प्लाईवुड इंडस्ट्रीज को भी इससे लाभ मिलेगा।
शहरी क्षेत्र में पौधारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए इस बार जुलाई में गमलों में लगने वाले फलदार पौधे भी वितरित किए जाएंगे। लोग गमलों में लगाकर गार्डन बना सकते हैं। इसके अलावा कैजुराइना भी किसानों के लिए वरदान साबित होगा।
शत्रुघ्न प्रसाद, वन क्षेत्राधिकारी सदर