शाहजहांपुर। भारतीय परंपरा में दीपावली में खानपान का विशेष महत्व है। खासतौर पर मिठाइयों से बच पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से इन दिनों त्योहार के उल्लास के चक्कर में सेहत का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है। ऐसा न हो कि ज्यादा तैलीय या मीठे पदार्थ खाने के बाद पछताना पड़े। एक्सपर्ट का कहना है कि त्योहार उत्साह के साथ मनाएं, मगर सेहत और क्षमता के अनुसार ही खानपान रखें।
डाइटीशियन डॉ. रश्मि पांडेय ने बताया कि दीपावली पर अक्सर लोग परहेज नहीं कर पाते हैं। मगर ऐसा न करने से तबीयत बिगड़ने का खतरा बना रहता है। लोगों को प्रतिदिन रूटीन के हिसाब से ही डाइट लेनी चाहिए। कम कैलोरी की चीजें खाएं। ज्वार, बाजरा के लड्डू फायदेमंद होंगे। सोनपापड़ी से बचने की कोशिश करें। उसकी जगह पर संभव हो तो काजू कतली खाएं, क्योंकि इसमें शुगर कम मात्रा में होती है। डायबिटिक मरीज शुगर फ्री मिठाई का सेवन करें।
फ्राई फूड लेने पर अगर दिक्कत महसूस होती है तो हींग, अजवाइन और काला नमक पानी में घोलकर लेना चाहिए।
सुबह की वर्कआउट से समझौता न करें। हालांकि अस्थमा के रोगियों को रात के वक्त आतिशबाजी चलने पर सुबह जल्दी टहलने से बचें। आयुर्वेदाचार्य डॉ. अवधेशमणि त्रिपाठी ने बताया कि आयुर्वेद में मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के अनुकूल संतुलित आहार के बारे में कहा गया है। अधिक तैलीय या मीठे पदार्थ सिर्फ हमारे पाचन तंत्र पर ही नहीं, बल्कि हृदय, फेफड़ों, मस्तिष्क, त्वचा, हार्मोनल सिस्टम पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।
साथ ही हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कम करते हैं। मोटापा, डाइबिटीज, लिपिड प्रोफाइल का बढ़ना, हार्ट अटैक, मैमोरी लॉस, कोरोनरी आर्ट्री ब्लॉकेज, मेटाबॉलिक डिसआर्डर जैसे रोगों का बढ़ना हमारे भोजन में तैलीय और मीठे पदार्थों के ज्यादा उपयोग का ही परिणाम है। आयुर्वेद में बताए गए आहार-विहार के निर्देशों का पालन कर हम आज के दौर में भी निरोगी और स्वस्थ रहकर आनंदमय जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
त्योहार पर भी खानपान का विशेष ध्यान रखें। शाम को हल्का भोजन लेना और 5-10 मिनट बाद 500 कदम चलना, सुबह प्रात:काल उठकर दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर नियमित एक घंटा किसी अच्छे योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में नियमित योग साधना करना हमारे स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
डाक्टर रश्मि पांडेय- फोटो : SHAHJAHANPUR