एडीएम अरविंद बोले- पिता घूमने आए थे
एडीएम अरविंद कुमार ने कहा कि पिता सिर्फ यह देखने आए थे कि बेटे का दफ्तर कैसा है। उनकी नसीहत को जीवन में उतारने की पूरी कोशिश करूंगा। उन्होंने बताया कि उनकी बहन कुमारी चिंता टीचर हैं, दो भाई चीनी निगम में कार्यरत हैं। मां धनरावती का 2018 में निधन हो गया था। वह शाहजहांपुर में पत्नी सौम्या के साथ रहते हैं।
संघर्षों से अधिकारी तक का सफर
एडीएम अरविंद ने बताया कि गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू हुई। 11वीं में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ी, लेकिन एक विवाद के बाद ठान लिया कि बदला पढ़ाई के दम पर ही लेंगे। गुस्से को पढ़ाई में लगाया और 2010 में ग्रेजुएशन, 2012 में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। 2013 में पीसीएस की तैयारी शुरू की।
पहली बार में असफल रहे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 2015 में ट्रेनिंग के बाद कुशीनगर में एसडीएम पद से सेवा की शुरुआत की। सुल्तानपुर और बहराइच में भी अहम जिम्मेदारी निभाई। 18 फरवरी 2025 को शाहजहांपुर में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के पद पर तैनात हुए।