शाहजहांपुर। दहेज के लिए बहू की हत्या के दोषी ससुर को अदालत ने दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। निगोही थाना क्षेत्र के पतराजपुर गांव के रहने वाले इलमचंद्र ने 10 मई 2011 को सिंधौली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि अपनी बेटी ऊषा देवी की शादी एक वर्ष पहले सिंधौली के बछियानी गांव के रहने वाले अवनीश से की थी।
दहेज से ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे। वे दहेज में सोने की एक चेन, बाइक और भैंस की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न करने पर बेटी को प्रताड़ित करते थे। नौ मई 2011 को ससुरालियों ने बेटी की हत्या कर दी। गांव के एक व्यक्ति से सूचना मिलने पर वह बेटी की ससुराल पहुंचे तो बेटी का शव बरामदे में रखी चारपाई पर पड़ा हुआ था। पुलिस ने विवेचना के बाद पति अवनीश कुमार, ससुर वीरेंद्र और सास रामश्री उर्फ वेदवती और ननद शशि देवी के विरुद्ध आरोपपत्र अदालत भेजा। बाद में वीरेंद्र को चिकित्सा के लिए मानसिक चिकित्सालय, वाराणसी भेजे जाने का आवेदन दिया गया। आवेदन मानसिक चिकित्सालय से वापस न आने के कारण वीरेंद्र और अन्य अभियुक्तों की पत्रावली अलग कर दी गई। बाद में विजिटर्स बोर्ड की बैठक में वीरेंद्र को स्वस्थ घोषित किया गया। इसके बाद वीरेंद्र उर्फ साधु पर अदालती कार्यवाही शुरू हुई। अपर जिला जज कृष्ण लीला यादव ने वीरेंद्र को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।