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राकिमसं ने मकसूदापुर में बंद कराई गन्ना तौल, मिल गेट पर जड़े ताले

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मकसूदापुर में बजाज चीनी मिल गेट बंद किए जाने की जानकारी पाकर पहुंची पुलिस के सामने किसानों और किस - फोटो : POWAYAN
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बंडा (शाहजहांपुर)। पिछले सत्र का गन्ना भुगतान कराने की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन (राकिमसं) के कार्यकर्ताओं ने रविवार को बजाज चीनी मिल मकसूदापुर के गेट में ताले जड़ दिए और तौल बंद करा दी। इस दौरान गन्ना लेकर आए किसानों और संगठन के नेताओं के बीच झड़प भी हुई। सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक तौल बंद होने के कारण बंडा-बिलसंडा मार्ग पर गन्ने से भीर ट्रैक्टर ट्रॉली और ट्रकों की लंबी लाइन लग गई। इससे आवागमन भी बाधित हो गया।
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पिछले वर्ष खरीदे गए गन्ने का भुगतान कराने को लेकर अक्तूबर में वीएम सिंह के संगठन राकिमसं के जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह के नेतृत्व में ज्ञापन दिया था। भुगतान की धीमी गति के चलते संगठन की ओर से शनिवार से मिल गेट पर धरना शुरू किया था। रविवार को पेराई ठप कराने की चेतावनी भी दी गई थी। इसी के तहत जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह, उमाशंकर, सचिन मिश्रा, रामशंकर मिश्रा आदि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सुबह लगभग दस बजे मिल का गन्ना गेट बंद कर दिया। गेट बंद होने पर गन्ना लेकर आए किसानों की संगठन के कार्यकर्ताओं से नोकझोंक हो गई। किसान गेट खोलने और गन्ना तौलने की मांग करने लगे।
जानकारी पाकर नायब तहसीलदार आशीष कुमार सिंह और बंडा से पुलिस मौके पर पहुंची। नायब तहसीलदार ने किसान नेताओं और मिल अधिकारियों से बात की, लेकिन समाधान नहीं हो सका। इसके बाद किसान गेट के पास ही धरने पर बैठ गए। किसानों ने नायब तहसीलदार को एसडीएम के नाम ज्ञापन देकर गत वर्ष का बकाया भुगतान कराने, मिल को आवंटित गन्ना क्षेत्र किसी अन्य मिल को हस्तांतरित करने की मांग की गई है। इस दौरान हरीश कुमार, सुरेश सिंह, लखविंदर सिंह, जितेंद्र सिंह, प्रेमसागर पटेल, सुरेंद्र सिंह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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यूनिट हेड सही से नहीं कर रहे बात
वार्ता के बाद राकिमसं के जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि बजाज चीनी मिल के यूनिट हेड वार्ता करने आए और कहा कि धरना प्रदर्शन से भुगतान नहीं मिल जाएगा। इससे किसान उत्तेजित हो उठे। मिल अधिकारियों से दो बार वार्ता के बाद भी हल नहीं निकल सका है।
गन्ना आयुक्त से की वार्ता
गेट बंद करने के बाद प्रदर्शन के दौरान संगठन के पीलीभीत के जिलाध्यक्ष प्रमसागर पटेल ने गन्ना आयुक्त से फोन वार्ता की। उन्होंने कहा कि किसान परेशान घूम रहा है और गन्ने का भुगतान नहीं दिया जा रहा है। गन्ना आयुक्त ने उनको जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन दिसा है।
रविवार सुबह आठ बजे मैंने किसानों के वार्ता की थी। किसान संगठन के लोगों ने गेट बंद कर रखा है। किसानों से कहा, गेट बंद न करें। गन्ना लेकर आए किसान जो लाइन में हैं उनका गन्ना अंदर आने दीजिए। चीनी और शीरा बेचकर पेंमट की जा रही है, लेकिन किसान नेता गेट खोलने को तैयार नहीं हैं। किसानों का गलत भाषा का प्रयोग करने का आरोप निराधार है।
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हितेंद्र सिंह, जीएम केन, बजाज चीनी मिल मकसूदापुर।
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