फसली नुकसान के सदमे से जिले में पहली बार किसानों की लगातार मौतों से शहर के प्रख्यात होम्योपैथ एवं मनो चिकित्सक डॉ. रवि मोहन भी हतप्रभ हैं। उन्हें ताज्जुब इसे लेकर है कि स्वभाव और कर्म से दिलेर जो किसान सदियों से मौसम की दगाबाजी का सामना करते रहे, उनका दिल इतनी आसानी से कैसे बैठा जा रहा। हालांकि, इसके लिए वह किसानों के आसपास बैठकर रंज और गम का माहौल बनाने वालों को जिम्मेदार मानते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह देशभक्ति के तराने सुनाकर सैनिकों को शहादत के लिए प्रेरित किया जाता है, वहीं माहौल गांवों में नुकसान प्रभावित किसानों से अतिशय सहानुभूति जताने वाले लोग बना रहे हैं। यही वजह है कि किसानों के दिल बैठ रहे हैं जबकि फसली नुकसान पहले भी होता रहा है। डॉ. मोहन के अनुसार किसी के दुख में शामिल होने वालों की नैतिक जिम्मेदारी है कि अपनी बातों से पीड़ितों का हौसला भी बढ़ाएं। प्रशासन इसकी पहल ग्राम प्रधानों के सहयोग से कर सकता है।