शाहजहांपुर। धान खरीद के प्रशासन के तमाम दावे सरकारी क्रय केंद्रों तक पहुंचकर ध्वस्त हो जाते हैं। नमी बताकर धान बेचने आए किसानों को वापस करने से सरकारी खरीद 40 दिन बाद भी केवल आठ प्रतिशत पर अटकी हुई है। वहीं, किसानों को करीब पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाकर धान आढ़त में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
एक अक्तूबर को धान खरीद शुरू हुई थी। जिले में 211 के सापेक्ष 186 क्रय केंद्र ही स्थापित हो सके थे। इनमें से 167 केंद्रों पर अब तक खरीद हुई है। जिले का खरीद लक्ष्य 315000 क्विंटल है लेकिन अब तक केवल 25 हजार 257.016 क्विंटल की ही खरीद हो सकी है।
अधिकारी अब तक कहते रहे कि धान में नमी होने के कारण खरीद की रफ्तार नहीं बढ़ सकी। तमाम किसानों का कहना है कि वे जब अपना धान लेकर सरकारी केंद्रों में पहुंचते हैं तो वहां पर उनसे कायदे से बात तक नहीं की जाती। नमी के साथ कई बहाने बनाकर परेशान किया जाता है।
वहीं, आढ़ती धान खरीदने में कोई परहेज नहीं करते और नकद भुगतान कर देते हैं। सरकार खाते में कुछ दिनों बाद भुगतान करती है। आढ़त पर धान बेचने से प्रति क्विंटल करीब पांच सौ रुपये का नुकसान जरूर होता है लेकिन उन्हें परेशान नहीं होना पड़ता।
अधिकतर किसानों ने अपनी धान की फसल काट ली है और वे गेहूं बोने की तैयारी कर रहे हैं। इसका अर्थ यही है कि किसान अपना धान आढ़तों पर बेच चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रशासन धान खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा करेगा?
तिलहर मंडी में क्रय केंद्र सूने, आढ़तों पर नौ गुना ज्यादा हुई धान खरीद
तिलहर। केंद्र प्रभारियों की मनमानी से मंडी परिसर में लगे विभिन्न एजेंसियों के खरीद केंद्र सूने पड़े हैं और वहां 39 दिनों में महज 23 हजार 134 क्विंटल धान की सरकारी खरीद हो सकी है। इसके विपरीत आढ़तों पर सरकारी खरीद की तुलना में आवक नौ गुना से ज्यादा करीब पौने दो लाख क्विंटल पहुंच चुकी है। केंद्र प्रभारी नमी ज्यादा बताकर किसानों का धान नहीं खरीद रहे हैं।
23 सौ रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के सापेक्ष बाजार में धान का लगभग 500 रुपये प्रति क्विंटल कम मूल्य मिल रहा है। किसान मजबूरी में घाटे का सौदा कर रहे हैं क्योंकि सेंटरों पर धान खरीद में आनाकानी हो रही है।
मंडी में आढ़तों पर अब तक एक लाख 72 हजार 746 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है, जबकि 22 सरकारी खरीद केंद्रों पर 23,134 क्विंटल खरीद हुई है। बाजार में 1800 से लेकर 1850 रुपये में धान की बिक्री हो रही है। मंडी सचिव रामनिवास ने बताया कि मंडी में विभिन्न एजेंसियों के 18 केंद्र खोले गए थे। 28 अक्तूबर को चार केंद्र बढ़ा दिए गए। इनमें डीसीडीएफ और केयूयसवी बीरमपुर शाखा के केंद्रों पर अब तक खरीद नहीं हुई है। संवाद
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किसानों की बात
लगभग दो सौ क्विंटल धान लेकर मंडी के क्रय केंद्रों पर गया, लेकिन वहां नमी बताकर धान लेने से इन्कार कर दिया गया। बाद में बाजार में धान को 1850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक्री कर दिया।
-जितेंद्र सक्सेना, कसरक
अपना लगभग 150 क्विंटल धान लेकर मंडी में लगे सेंटरों पर गया, लेकिन किसी ने भी नहीं खरीदा। मजबूरी में बाजार में 1800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से धान बेचना पड़ा।
-विश्वनाथ यादव, जोधपुर नवदिया
त्योहारी सीजन की वजह से धान खरीद धीमी चल रही थी। त्योहार निपटने के बाद सुधार हो रहा है। खरीद बढ़ाने के लिए कैंप लगाकर किसानों का पंजीकरण कराया जा रहा है। पिछले वर्ष धान बिक्री करने वालों से किसानों से फोन पर संपर्क करके प्रोत्साहित किया जा रहा है। केंद्र प्रभारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे किसानों को क्रय केंद्रों पर धान बिक्री करने के लिए जागरूक करें।
- संजय कुमार पांडेय, एडीएम प्रशासन व जिला धान खरीद अधिकारी
डीएम की सख्ती के बाद कलान में हुई धान की खरीद
कलान। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह द्वारा तहसील में धान की सरकारी खरीद में सुस्ती को लेकर सख्त तेवर दिखाने के बाद रविवार को यहां साधन सहकारी संघ स्थित क्रय केंद्र पर समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू की गई। बता दें कि क्षेत्र में धान की फसल पिछैती होने के कारण अभी क्रय केंद्रों पर पर्याप्त आवक नहीं हो रही है। क्रय केंद्र प्रभारी गजेंद्र सिंह व परिमाल सिंह ने बताया है कि रविवार से धान की खरीद शुरू हो गई है। संवाद
जितेंद्र सक्सेना
जितेंद्र सक्सेना