गेहूं की कटाई के बाद खेतों में लगी नरई जलाने पर आमादा किसान शासन से अनुदान पर उपलब्ध कृषि यंत्रों के जरिए उसे खेत में पलटकर जैविक खाद बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। बता दें कि रोटावेटर, पैडी रीपर, डिस्क हैरो आदि कृषि यंत्र खेतों की जुताई कर उनमें खड़ी नरई समेत अन्य वनस्पतियों को खेत में पलटने में इस्तेमाल होते हैं। अगिभनकांड रोकने को नरई को जलाने पर प्रतिबंध कड़ाई से लागू नहीं होने के कारण किसानों की इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही है।
नरई जलाने से हर साल धधकते हैं खेत-खलिहान
हर साल रबी फसल तैयार होने के बाद गेहूं की कटाई का काम शुरू होने के साथ खेतों को अगली फसल के लिए खाली करने के फेर में नरई जलाने से आसपास के खेत-खलिहानों की फसल भी आग की लपटों से घिरकर धधकने लगती है। इस वर्ष 2.68 लाख हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की फसल कटने के साथ कई स्थानों पर खेतों से लेकर गांव तक आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। अगिभनकांडों की रोकथाम के लिए डीएम विजय किरन आनंद ने नरई जलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी, लेकिन अभी तक ऐसे मामलों में कोई सख्त कदम नहीं उठाए जाने से किसान नरई को माचिस की तीली दिखाने से बाज नहीं आ रहे।
नरई के निस्तारण में यह कृषि यंत्र होंगे सहायक
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोई भी फसल कटने के बाद खेत में शेष बची नरई, गन्ने की खुंभी आदि वनस्पतियों को जलाने से आासपास के खेतों में आग लगने का खतरा बढ़ने के साथ मिट्टी के तमाम पोषक तत्व और जीवांश को व्यापक क्षति पहुंचती है। इससे कृषि उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे बचने के लिए किसान रोटावेटर, तवे वाले डिस्क हैरा, पैडी रीपर, रीपर कंबाइडर से नरई समेत अन्य वनस्पतियों के अवशेष जुताई करके खेत में पलटने और पानी भरने से उसे खाद में बदल सकते हैं। इससे नरई जलाने का झंझट नहीं रहेगा और मिट्टी के पोषक तत्वों में भी बढ़ोत्तरी होगी।
50 पैडीरीपर की शासन को भेजी डिमांड
नरई को खेत में जमींदोज करके उसे खाद में बदलने वाला यंत्र पैडी रीपर किसानों को अनुदान पर उपलब्धा कराने के लिए शासन को 50 पैडी रीपर की डिमांड भेजी गई है। कृषि यंत्रों के वितरण की जिम्मेदारी संभाले यूपी डॉस्प के परियोजना प्रभारी डॉ. राजीव कुमार के अनुसार करीब 2.25 लाख रुपये कीमत वाले पैडी रीपर पर 35 हजार रुपये अनुदान देय है, लेकिन महंगी मशीन की खरीद करना छोटे किसानों के लिए संभव नहीं है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर किसानों को नरई का निस्तारण करने वाले यंत्र उउपलब्ध कराने की काय्र योजना बनाई गई है। छोटे किसानों की पूंजीगत विवशता को देखते शासन स्तर पर होने वाली बैठक में अनुदान राशि में बढ़ोत्तरी करने संबंधी प्रस्ताव रखने का निनर्णय किया है।
नरई का वैज्ञानिक तरीके से करें निस्तारण
नरई के निस्तारण के लिए जिले में करीब चार सौ रोटावेटर उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त डिस्क हैरो, पैडी रीपर आदि यंत्रों को भी किराए पर लेकर प्रयोग किया जा सकता है। इन यंत्रों से खेत में जुताई करने के बाद प्रति हेक्टेयर 25 किलो नाइट्रोजन डालकर पानी भर दिया जाए तो नरई खेत में ही सड़-गलकर जैविक खाद का प्रभाव पैदा करेगी। नरई को जलाने का नया मामला प्रकाश में आने पर संबंधित लोग सख्त कार्रवाई को तैयार रहें। -डॉ. राधाकृष्ण यादव, कृषि उप निदेशक