मामला वर्ष 2006-07 का है। सरकार ने एससीपी (स्पेशल कंपोनेंट प्लान)के तहत दलित परिवार के एक व्यक्ति को रोजगार के लिए बीस हजार रुपए कर्ज देने की योजना शुरू की थी। योजना के तहत अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम को आवेदन कर एडीओ समाज कल्याण की संस्तुति पर दिए गए कर्ज को सरकार को अनुदान के रूप में बैंकों को वापस करना था, लेकिन तमाम लोग बिना कर्ज लिए ही योजना के लाभार्थी दर्शा दिए गए। कई परिवारों के एक से अधिक व्यक्ति के नाम भी योजना का लाभ दिखाया गया है। गुरघिया के रामसेवक, राकेश, प्रभूदयाल, लालता प्रसाद, रामेश्वर, भूरेलाल, देवेंद्र, ख्यालीराम, रामप्रेम, जयकरन, जगदीश, अश्वनी, रामदयाल आदि का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर पहचान और पते की आईडी, फोटो आदि ले लिए गए और बैंक में उनके खाते खुलवाकर फर्जी रूप से कर्ज निकालकर हड़प लिया गया। बाद में सरकार की ओर से अनुदान राशि मिलने पर खाते बंद कर दिए गए।
मामले की शिकायत होने पर बृहस्पतिवार को बैंक के डीजीएम सच्चिदानंद दुबे जांच के लिए गांव गुरघिया पहुंचे। जांच के लिए लोग बुलाए गए तो तमाम लोगों ने कहा कि उन्होंने कोई कर्ज नहीं लिया है। गांव सौंफरी, मोहनपुर सहित कई गांवों के लोगों के नाम फर्जीवाड़ा कर रुपए निकाले जाने की आशंका है। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और डीएम से भी की गई है।
मामला छह-सात वर्ष पुराना है। जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
सच्चिदानंद दुबे डीजीएम जिला सहकारी बैंक शाहजहांपुर