फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahjahanpur News: बेहोशी, चिड़चिड़ापन और उदासी मानसिक बीमारी...गर्मी में बढ़े रोगी

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। गर्मी में घबराहट, बेचैनी, दिल की धड़कन बढ़ना और चिड़चिड़ा होने को हल्के में नहीं लें। यह सामान्य दिक्कत नहीं, बल्कि मानसिक बीमारी हो सकती है। तापमान में इजाफा होने से अवसाद और कन्वर्जन डिसऑर्डर हिस्टीरिया से पीड़ित मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। युवा सबसे ज्यादा मानसिक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। हिस्ट्रीरिया की बीमारी लड़कियों को गिरफ्त में ले रही है।
विज्ञापन

तापमान के बढ़ने के साथ ही लोग बुखार, खांसी, डायरिया आदि रोगों से ग्रसित होने लगे। मौसम बदलने से मानसिक रोग का खतरा भी बढ़ा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में अवसाद और कन्वर्जन डिसऑर्डर हिस्टीरिया के मरीज आ रहे हैं। 20 और 40 वर्ष उम्र के लोग उदासी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, आत्महत्या करने का ख्याल आने की समस्या लेकर आते हैं।
डॉक्टर के अनुसार, न्यूरो ट्रांसमीटर अनियंत्रित होने के कारण सीजनल डिसऑर्डर के मरीज बढ़ते हैं। इसमें मरीज की स्थिति को देखते हुए छह महीने तक दवा खानी पड़ती है, साथ ही साइकोथैरेपी भी करना पड़ती है।
विज्ञापन

इसी तरह कन्वर्जन डिसऑर्डर हिस्टीरिया रोग के चपेट में गर्मी में 15 से 25 वर्ष की लड़कियां ज्यादा आ रही हैं। अचानक से बेहोश हो जाना, आधे घंटे तक होश नहीं आना, बेचैनी, धड़कन बढ़ जाना, सांस लेने में दिक्कत होने की समस्या होती है।
आमतौर पर लोग भूत-प्रेत का साया मानकर झाड़-फूंक करने वालों के पास ले जाते हैं,लेकिन यह मानसिक विकार होता है।
-
केस एक
तिलहर के एक गांव की रहने वाली 17 साल की किशोरी को बेहोशी, घबराहट और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उसकी आवाज नहीं निकलती थी। परिवार वाले उसे बाबा के पास लेकर गए। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। फिर अस्पताल लाने पर डॉक्टर ने उसका उपचार शुरू किया। उसकी हालत में सुधार है।

केस दो
पुवायां कस्बे की युवती बीए की छात्रा है। गर्मी बढ़ने पर वह उदास रहने लगी। चिड़चिड़ापन होने के साथ ही जीवन खत्म होने के विचार आने लगे। परिजन ने वजह पूछी तो कुछ बात नहीं बताई। परेशान होकर परिजन ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में दिखाया। काउंसलिंग और दवा के बाद राहत मिली।
-
कोई भी मानसिक बीमारी होने पर सतर्क हो जाना चाहिए। दवाई नहीं छोड़नी चाहिए। लक्षण दिखने पर झाड़-फूंक करने वालों के चक्कर में न पड़ें और डॉक्टर से उपचार कराएं।
विज्ञापन

- डॉ. रोहताश सिंह ईशा, मनोविश्लेषक, राजकीय मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें