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नए उद्योगों की स्थापना और उत्पादन बढ़ाने को मिलेगा बेहतर माहौल

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अशोक सिंह - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। प्रदेश मेें दोबारा बनने जा रही भाजपा की सरकार से जनपद के उद्यमियों ने तमाम उम्मीदें लगा रखी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ हमेशा नए उद्योगों के माध्यम से रोजगार स्रजन के अवसर तलाशने और देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार को प्रयासशील रहे, लेकिन उद्यमियों का मानना है कि नौकरशाही इस दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाने के बजाय सरकार की मंशा को पलीता लगाती रही है। उद्यमियों का कहना है कि योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में औद्योगिक विकास की दिशा मेें जो कमियां रह गईं, नई सरकार उन्हें दूर करके स्टार्ट अप (नवीन उद्योगों) की स्थापना और उत्पादन को बढ़ावा देने वाला माहौल बनाएगी।
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धरातल पर उतरे विकास की मंशा
मोदी और योगी औद्योगिक विकास की मंशा लगातार जताते रहे हैं, उसे धरातल पर लाने के लिए जरूरी है कि अधिकारी भी सरकार की मानसिकता के अनुसार काम करें। काम करने की अनुकूल परिस्थितियां देने के लिए ईजी ऑफ डुइंग बिजनेस सिर्फ नाम का नारा रहा, काम का नहीं। उम्मीद है कि नई सरकार बनने पर यूपीसीडा के अधीन दशकों पुरानी उद्योग इकाइयों के भूखंड फ्रीहोल्ड किए जाएंगे और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी विभागों के दलालों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। -अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
तरक्की के रास्ते में आने वाली अड़चनें दूर हों
कोरोना काल में सभी काम-धंधों पर असर पड़ा, लेकिन उद्योग क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। इसलिए नई सरकार से उद्यमियों को उत्पादन का बेहतर माहौल मिलने की बहुत उम्मीद है। जिस तरह सरकार ने स्टार्ट अप को बढ़ावा देने में अपनी दिलचस्पी दिखाई है, उसे देखते लगता है कि प्रदेश की नई सरकार उद्योग क्षेत्र की तरक्की के रास्ते में आ रहीं अड़चनें दूर करने को प्राथमिकता देगी। सरकार स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए नए उद्योगों को टैक्स में रियायत दे सकती है। -अनुज गुप्ता, निवर्तमान जिला सचिव, आईआईए
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परिवहन व्यवस्था बेहतर हो और पर्याप्त बिजली मिले
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ पर्याप्त बिजली मिलना और महंगाई को नियंत्रित करना जरूरी है। योगी सरकार में सुरक्षा व्यवस्था काफी बेहतर रही, लेकिन कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान परिवहन व्यवस्था लड़खड़ाने का उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। लोहा की कीमतें बढ़ जाने से सारी मशीनरी महंगी हो रही है। उम्मीद है कि नई सरकार यह सभी दिक्कतेे दूर करेगी। ऐसा होने पर नए उद्योग तेजी से स्थापित होंगे। -शुभम खन्ना, जिलाध्यक्ष, आईआईए
तत्परता से दूर की जाएं उद्यमियों की समस्याएं
सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए सरकार ने योजनाएं बहुत बनाई हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर लाए बिना उद्योगों का भला नहीं होगा। उद्योगों को ऋण की जरूरत होती है, लेकिन बैंकिंग नीतियां इतनी कठिन हैं कि उन शर्तों को पूरा कर पाना आसान नहीं होता। सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा दे रही है, लेकिन नए उद्योगों की राह में अड़चनें भी बहुत हैं। यूपीसीडा ने रखरखाव शुल्क तीन गुना बढ़ा दिया है, जिसे कम करने की जरूरत है। उम्मीद है कि नई सरकार ये समस्याएं दूर करने में तत्परता दिखाएगी। -रोहित गोयल, जिला सचिव, आईआईए
सरकार की नीतियां व्यापारियों के हित में नहीं
सरकार से पहले भी कभी राहत नहीं मिल पाई है और आगे भी कोई उम्मीद नहीं है। सरकार की नीतियां व्यापारी हितों में नहीं है। इसमें बदलाव करने की आवश्यकता है। राइस मिल का व्यापार लगभग समाप्ति की ओर है। लेवी सिस्टम यदि सरकार लागू कर दे तो हम लोग स्वतंत्र हो जाएंगे और व्यापार भी ठीक चलेगा। राइस मिल के व्यापार पर खास ध्यान देने की जरूरत है। सरकार अगर ऐसा करेगी राइस मिल मालिकों के लिए बहुत अच्छा होगा। - संतोष गुप्ता, राइस मिलर्स गुनगुन इंडस्ट्रीज तिलहर।
उद्योग-व्यापार को राहत दी जाए
भाजपा की लगातार दूसरी बार सरकार गठित होने जा रही है। उम्मीद है कि सरकार उद्योग-व्यापार को कुछ राहत देगी। वैसे महंगाई का दौर जारी है और आम आदमी परेशान है। फिलहाल सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों के चार महीने से कोई रेट नहीं बढ़ाए हैं। सभी को संतोष करके चलना पड़ेगा। दाम न बढ़ना भी राहत महसूस करने जैसा है। हालांकि सरकार से उम्मीद है कि वह व्यापारियों और उद्योगों के लिए बेहतर काम करेगी।
अशोक सिंह, जिलाध्यक्ष एलपीजी एसोसिएशन।
किसानों को मिले फसल का उचित मूल्य, समय पर हो भुगतान
कृषि को लेकर पिछली बार उपेक्षा हुई है, लेकिन इस बार उपेक्षा की उम्मीद नहीं है। इस बार सरकार को किसानों की फसल का उचित मूल्य दिलाने और समय से भुगतान मिलने पर फोकस होना चाहिए। इसके अलावा महंगाई भी रफ्तार पकड़ रही है इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। 15 दिन में सरिया के रेट दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए है। इससे सभी कृषि यंत्रों पर फर्क पड़ेगा, इसीलिए सरकार को महंगाई पर भी अंकुश लगाना चाहिए।
धीरज शर्मा, कृषि यंत्रों के निर्माता एवं विक्रेता पुवायां
एमएसएमई के तहत मिले उद्योगों को अनुदान
सरकार से पहली मांग रहती है कि कृषि बिलों में मंडी शुल्क हटा दिया गया था। कृषि बिल वापस होने पर मंडी शुल्क फिर से लग गया। इसको बंद करना चाहिए। एमएसएमई के तहत उद्योग को सब्सिडी दी जानी चाहिए। उद्योग को बिजली में छूट होनी चाहिए। इससे उद्योग को बेहतर करने में राहत मिलेगी। हमें इस बार मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं कि राहत मिलेगी। उद्योग किसी भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति का आधार होते हैं।
मोहन मित्तल, अध्यक्ष राइस मिलर्स एसोसिएशन बंडा

अनुज गुप्ता ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

शुभम खन्ना ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

रोहित गोयल ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

संतोष गुप्ता- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

धीरज शर्मा कृषि यंत्रों के निर्माता एवं विक्रेता पुवायां- फोटो : KHUTAR

 

मोहन मित्तल अध्यक्ष राइस मिलर्स एसोसिएशन बंडा- फोटो : KHUTAR

 

अशोक अग्रवाल ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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