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कैंट में पेड़ की डालें गिरने से 33 केवी लाइन टूटी

Mon, 11 May 2015 11:24 PM IST
शाहजहांपुर
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रोजाना नौ घंटे की नियमित बिजली कटौती के बावजूद भीषण गर्मी में आधी रात को होने वाली आपात कटौती को लोग सहन नहीं कर पा रहे। ऐसे में लाइन फाल्ट बिजली संकट को बढ़ावा देकर कोढ़ में खाज जैसे हालात पैदा कर रहे हैं। रविवार को दिन भर और रात दस बजे से दो घंटे की आपात कटौती से लोग उबर भी नहीं पाए कि कैंट एरिया में पेड़ की डालें टूटकर गिरने से 33 केवी लाइन के तार गिर गए। तीन घंटे की मशक्कत के बाद यह फाल्ट ठीक करके सप्लाई शुरू की गई, लेकिन दिन में बिजलीपुरा की 11 केवी लाइन ओवरलोडिंग से जल गई। बिजली नेटवर्क की इन खराबियों के कारण शहर के कई मोहल्लों और कालोनियों को 24 घंटे में बमुश्किल चार-पांच घंटे ही बिजली मिल पाई।
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शहर के बहादुरगंज और गोविंदगंज सब स्टेशनों को बिजली देने वाली 33 केवी लाइन पैना के ट्रांसमिशन सब स्टेशन से पुवायां रोड और कैंट एरिया होकर गोविंदगंज तक निकाली गई है। इसी लाइन पर एमईएस दफ्तर के पास रात करीब 12 बजे पेड़ की दो डालें टूटकर गिरने से लाइन क्षतिग्रस्त हो गई और उसके तार जमीन पर आ गिरे। चूंकि, उस वक्त आपात कटौती जारी थी, इसलिए लाइन फाल्ट का तत्काल पता नहीं चल पाया।
लाइन में खराबी का अहसास गोविंदगंज सब स्टेशन के एसएसओ को उस वक्त हुआ जब सवा 12 बजे शहर के अन्य सभी सब स्टेशनों को सप्लाई मिलने लगी, लेकिन गोविंदगंज के पैनल रूम में इनकमिंग फीडर को करंट नहीं मिला। चूंकि, इसी लाइन से आगे बहादुरगंज सब स्टेशन को बिजली फीड होती है। इसलिए वहां भी बिजली नहीं पहुंचने पर एसएसओ ने अफसरों को वस्तु स्थिति बताकर सप्लाई चालू कराने का आग्रह किया।
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शहर के दो महत्वपूर्ण सब स्टेशन बंद होने की खबर से अफसरों में हड़कंप मच गया। रात करीब एक बजे एक्सईएन सिटी अशोक शुक्ला, एसडीओ इंद्रराज यादव और जेई शैलेंद्र पांडेय गोविंदगंज सब स्टेेशन पहुंचे। अफसरों ने वहां के तकनीकी स्टाफ को साथ लेकर अंधेरे में लाइन की पेट्रोलिंग शुरू कराई। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद एमईएस के पास तार टूटे मिले। एक घंटा लाइन को ठीक करके बिजली सप्लाई चालू करने में लग गया, लेकिन 15 मिनट बाद ही फिर से कटौती चालू हो गई। उधर, बिजलीपुरा में सोमवार को सुबह नौ बजे 11 केवी लाइन के तार अचानक जलकर टूट गए।


इन सभी इलाकों में बिजली को तरसे लोग
33 केवी लाइन फाल्ट से बहादुरगंज, गोविंदगंज, ऑफीसर्स कॉलोनी, डीएम कंपाउंड कॉलोनी, रोडवेज बस स्टेशन, स्टेशन रोड, सिविल लाइंस, इंदिरानगर, चर्च कॉलोनी, कटिया टोला, कचहरी तिराहा, सेठ एनक्लेव, खिरनीबाग, सदर बाजार, तारीन टिकली नई कॉलोनी, मल्हार मोड़, तारीन बहादुरगंज, मशीनरी मार्केट, बहादुरपुरा, ब्रजविहार कॉलोनी का पश्चिमी हिस्सा, कृष्णानगर और लकड़ी मंडी के पूर्वोत्तर इलाके  में रहने वाले लोग पूरी रात बिजली को तरसे।


72 मेगावाट की मांग, मिल
रही 65 मेगावाट बिजली
पॉवर कारपोरेशन के अफसरों का कहना है कि प्रदेश में ताप बिजलीघरों में उत्पादन कम होने के बावजूद डिमांड बढ़ रही है और इसी वजह से जिले में भी मांग और आपूर्ति का संतुलन गड़बड़ा रहा है। अपने शहर को ही लें। यहां 72 मेगावाट दैनिक खपत की जगह सिर्फ 65 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसी तरह ग्रामीण सब सटेशनों पर 108 मेगावाट की मांग है, लेकिन वहां 86 मेगावाट बिजली पहुंच रही है। इस तरह जिले को 29 मेगावाट बिजली कम मिल रही है।


22 प्रतिशत लाइन लॉस
से कटौती को बढ़ावा
पॉवर करपोरेशन के एक्सईएन सिटी एके शुक्ला के अनुसार पुरानी हो चुकी लाइनों में ही करीब 22 प्रतिशत बिजली खप रही है। उन्होंने कहा कि लाइन लॉस से विभाग को होने वाली क्षति रोकने के लिए एपीडीआरपी स्कीम के तहत कार्यदायी संस्था एनकेजी से नई लाइनों का काम कराया जा रहा है।


धरा रह गया सब स्टेशनों का इंटर कनेक्ट सिस्टम
लाइन फाल्ट से प्रभावित सब स्टेशन को बिजली की वैकल्पिक सप्लाई के लिए शहर के सभी सब स्टेशनों को 11 केवी लाइनों से इंटर कनेक्ट किया गया है। दो दिन पहले पीलीभीत के दौरे से लौटे पॉवर कारपोरेशन के निदेशक प्रशासन बीपी शर्मा से अधीक्षण अभियंता आरएस प्रसाद ने लंबीं डींगें हांकी, लेकिन रविवार की रात 33 केवी लाइन डैमेज होने पर महकमे का यह सिस्टम धरा रह गया।

नेपाल भेज दिए गए नई लाइन के पोल
दरअसल, इंटर कनेक्ट सिस्टम का लोड मौजूदा शहरी नेटवर्क से अलग रखने के लिए विभाग अभी तक 33 केवी की नई लाइन तैयार नहीं कर सका है। लाइन खड़ी करने के लिए स्टोर से पोल समेत अन्य सामान भी हासिल किया गया, लेकिन इस लाइन के खंभे नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में नई लाइनें बनाने के लिए भेज दिए गए। इसका खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब मिश्रा गुट के व्यापारियों द्वारा घेराव किए जाने पर एसई प्रसाद ने ठेकेदार से लाइन नहीं बन पाने की वजह पूछी।
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