फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिसर्च में मौलिकता की कमी से दूर हो रहे ‘नोबेल’

Sun, 01 Mar 2015 10:27 PM IST
शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एडीएन वाजपेयी का मानना है कि हायर एजूकेशन की गुणवत्ता मेें लगातार गिरावट आ रही है। इसके लिए कहीं न कहीं राज्य सरकारें भी जिम्मेदार हैं। उनका अपेक्षित योगदान नहीं मिलने, वित्तीय-मानवीय संसाधन और कानून-न्याय की व्यवस्था कमजोर होने से उच्च शिक्षा में गिरावट आ रही है।
विज्ञापन

एसएस कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बतौर विशिष्ट शिरकत करने आए कुलपति प्रोफेसर वाजपेयी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वर्तमान में अकादमिक लीडरशिप भी अपने दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर रही है। सभी टाइमपास करने को सेवाएं दे रहे हैं। उनमें प्रतिबद्धता की कमी है। विद्यार्थियों में भी लापरवाही बढ़ी है। अकादमिक लीडरों की सृजनात्मकता में अध्यात्मिकता का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। सभी स्वार्थी हो रहे हैं। शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों में मौलिकता की कमी होती जा रही है।
एक सवाल के जवाब में कुलपति प्रो. वाजपेयी ने कहा कि हमारे देश के शोधार्थी वेदों, उपनिषदों, भागवत, मीरा, तुलसी, कबीर, वेद व्यास, जायसी आदि पर शोध न करके विदेशियों को महत्व दे रहे हैं, जो चिंताजनक हैं। आज युवाओं पर ब्रिटिशकालीन पद्धति हाबी है, जिसमें ‘यू-टर्न’ की आवश्यकता है। रिसर्च मेें मौलिकता की कमी से हम नोबेल पुरस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। शोधार्थियों को चाहिए कि वह विदेश की नहीं, अपने देश और अपने अनुसंधान की बात करें।
विज्ञापन


हायर एजूकेशन का हिस्सा बन सकती है बीटीसी
शाहजहांपुर। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के कुलपति प्रोफेसर मुशाहिद हुसैन ने कहा है कि अर्से से बेसिक शिक्षा का हिस्सा रही बीटीसी अब हायर एजूकेशन से जुड़ सकती है। इसके लिए गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
कुलपति प्रोफेसर हुसैन एसएस कॉलेज के दीक्षांत समारोह में शामिल होने आए थे। समारोह स्थगन की सूचना के बाद अमर उजाला से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि सभी महाविद्यालयों में ऑनलाइन प्रवेश व्यवस्था शुरू करने में कुछ अड़चनें आ रही हैं, लेकिन उनका प्रयास होगी कि शीघ्र यह व्यवस्था सभी जगह लागू कर दी जाए। बताया: कुछ महाविद्यालयों ने व्यक्तिगत रूप से इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है। हालांकि परीक्षा संबंधी कार्य ऑनलाइन हो चुका है।
कुलपति ने कहा कि पिछले लगभग चार वर्षों से पीएचडी में प्रवेश पर लगी रोक हट चुकी है। उसे अब लागू किया जा चुका है। बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम और उसके सेमेस्टरवार शुरू होने पर प्रोफेसर हुसैन ने कहा कि यह प्रकरण प्रोसेस में है और सेेलेबस तैयार करने प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक सवाल के जवाब में कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं नौ मार्च से शुरू हो रही है, इसकी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें