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डीएम ने जानीं जिला अस्पताल की ‘बीमारियां’

Tue, 12 Apr 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
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डीएम ने जानीं जिला अस्पताल की ‘बीमारियां’
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निरीक्षण के पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल प्रशासन ने अपनी ओर से तो पूरी तैयारी कर रखी थी लेकिन जब डीएम विजय किरन आनंद ने अपने अंदाज में निरीक्षण करना शुरू किया तो एक-एक कर जिला अस्पताल की ‘बीमारियां’ सामने आती चलीं गईं। डीएम ने मरीजों और तीमारदारों से सीधे बात कर जानकारी ली तो ब्लड मुहैया कराने में लापरवाही से लेकर बाहर से दवा लिखने तक के मामले खुलने लगे। चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल और नान मेडिकल स्टाफ से सवाल किए जो लोगों को जवाब भी नहीं सूझा। डीएम ने कार्रवाई के लिए चेतावनी दी सबके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। डीएम का रुख देखकर जिला अस्पताल में हड़कंप मचा रहा। खामियों पर गुस्साए डीएम ने इस दौरान सीएमओ डॉ. कमल कुमार, सीएमएस डा. केशव स्वामी को अस्पताल की व्यवस्था तुरंत सुधारने के निर्देश दिए।
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दवाई थी फिर भी बाहर की लिखी
एक्स-रे रूम का निरीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी जब बाहर निकले तो रोजा क्षेत्र के सीटू कनौजिया ने शिकायत की अस्पताल के डाक्टर बाहर की दवा लिखते हैं। डीएम ने सीएमएस से कहा कि अगर कोई डाक्टर बाहर की दवा लिख रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिर वह सीटू को साथ लेकर दवा स्टोर तक गए और लिखी गई दवा की जांच कराई। लिखी गई दवा स्टोर रूम में उपलब्ध नहीं थी लेकिन उसकी स्थानापन्न दवा मौजूद थी। डीएम ने इस पर नाराजगी जाहिर की कि स्थानापन्न दवा मौजूद है तो वह क्यों नहीं लिखी गई। 

महिला काउंसलर को रिच डाइट का पता नहीं
डीएम ने ओपीडी में कम भीड़ देखकर डॉक्टरों का ओपीडी रजिस्टर चेक किया और सीएमएस से डॉक्टरों के ओपीडी रजिस्टर की पूरी माह की रिपोर्ट मांगी। महिला अस्पताल में ओपीडी के बाहर महिलाओं की भीड़ देखकर उन्होंने और कुर्सी लगाए जाने के निर्देश दिए और कहा कि ध्यान रखें, कोई महिला जमीन पर नहीं बैठेगी। फिर वह महिला अल्ट्रासाउंड की तरफ पहुंचे और परिवार नियोजन काउंसलर रिचा से रिच डाइट के बारे में पूछा तो वह बता ही नहीं पाई। इस पर डीएम ने काउंसलर को चेताया कि 15 दिन में अंदर काम में सुधार नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी।
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सफाई ठेकेदार को चेताया जेल जाना पड़ेगा
जिला अस्पताल के निरीक्षण के समय डीएम ने सफाई ठेकेदार रामकिशोर को भी तलब किया और सफाई संबंधी जानकारी ली। डीएम को इमरजेंसी में गंदगी मिली तो उन्होंने गुस्साते हुए पूछा कि सफाई के लिए 18 कर्मचारी लगा रखे हैं तो सफाई क्यों नहीं हो रही है। वार्डों में भी सफाई की स्थिति देखकर डीएम संतुष्ट नहीं हुए और सीएमएस को निर्देश दिया कि बेड पर बिछाई जाने वाले चादरों पर अलग-अलग रंग के टैग लगाएं ताकि पता चले कि किस दिन कौन से कलर टैग की चादर बिछाई जानी है और कौन सी बिछाई जा रही है। सफाई ठेकेदार को चेताया कि अब गंदगी मिली तो पिछला भुगतान तो वसूला ही जाएगा, जेल की हवा भी खानी पड़ जाएगी। 

‘ब्लड बैंक में नहीं है तो मेरा खून ले लो’ 
जिला अस्पताल के निरीक्षण पर निकले डीएम जब तीमारदारों से रूबरू हुए तो जिला अस्पताल प्रशासन और स्टाफ की कार्यशैली की पोल खुलती चली गई। जिला अस्पताल में भर्ती श्वांस रोगी रीना की बहन मीरा एबी निगेटिव ब्लड के लिए ब्लड बैंक स्टाफ से मनुहार कर रही थी लेकिन स्टाफ उन्हें टरका रहा था। इसी दौरान डीएम उधर से गुजरे तो महिला ने डीएम से गुहार की कि साहब मरीज की हालत बिगड़ रही है और लोग खून के लिए भटका रहे हैं। यह सुन डीएम मीरा के पास गए और पूरा ब्यौरा लिया। फिर उसे लेकर ब्लड बैंक पहुंचे। पता चला कि मरीज को दो यूनिट एबी निगेटिव ब्लड चाहिए और ब्लड बैंक में केवल एक यूनिट ब्लड है। दूसरे यूनिट की व्यवस्था बरेली से हो पाएगी। इसकी व्यवस्था के लिए तीमारदार को कह दिया गया है। ये सुनकर डीएम गुस्सा गए और बोले कि ऐसे तो मरीज को मार ही डालोगे। अस्पताल है या और कुछ। फिर स्टाफ से कहा कि मेरा भी ग्रुप एबी निगेटिव है। एक यूनिट लेकर मरीज को तुरंत दो। बाकी तुम लोगों की खबर बाद में लेता हूं। इसके बाद वह डोनर रूम में गए और ब्लड देने लगे। सूचना विभाग और मीडिया इसकी फोटो लेने बढ़े तो उन्होंने प्रचार के पचड़े में डालने के लिए मना किया और डोनर रूम बंद करवा लिया। रक्कदान के बाद डीएम मेडिकल और सर्जिकल वार्ड में गए और मरीजों से बातचीत की। 
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