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तीन मंत्रियों वाले जिले के हाथ लगी बजट में मायूसी

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शाहजहांपुर में टीवी बजट को देखते लोग । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। योगी सरकार 2.0 के पहले बजट से जिले के लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन हाथ निराशा लगी। नगर सीट से विधायक और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सदन में बजट पढ़कर सुना रहे थे। लोग आशापूर्ण निगाहों से उन्हें देखते रहे, मगर जिले के लोगों के हाथ मायूसी ही लगी। जिले में दो कैबिनेट और एक राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार होने के बावजूद जिले के लिए बजट अपेक्षाकृत नहीं रहा।
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लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद योगी सरकार में जिले को पहली बार तीन मंत्री मिले हैं। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के अलावा जेपीएस राठौर को सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा प्रदेश सरकार में सौंपा गया था। जिले की झोली तो मंत्रियों से भर दी गई मगर बजट में विशेष कुछ नहीं मिला। जिले की सभी छह सीटों पर इतिहास में पहली बार कमल खिला था। चुनाव परिणाम के ढाई महीने बाद आए बजट में जिले को कुछ खास नहीं मिला है।
ये थीं उम्मीदें
किसान बहुल जिले में कृषि विश्वविद्यालय की मांग लंबे समय से उठती आई है। शाहजहांपुर में स्थापित सौ साल से ज्यादा पुराने गन्ना शोध संस्थान को विकसित करने की जरूरत है। हाल में ही जलालाबाद स्थित भगवान परशुराम जन्मस्थली को पर्यटन स्थल का दर्जा दिया है। जलालाबाद में घोषणा के वक्त पर्यटन मंत्री ने जन्मस्थली के विकास के लिए धन आवंटित कराने का वादा किया था। माना जा रहा था कि बजट में पर्यटन स्थली के लिए कोई घोषणा होगी। मेडिकल कॉलेज के अलावा जिला अस्पताल की स्थापना के लिए प्रयास नजर नहीं आए। शहर के लिए नए उद्योग-धंधे, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज की उम्मीद भी थी।
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...कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, वरना सरकार बेवफा नहीं होती
बजट से सिर्फ आम वोटर को लाभ होगा, क्योंकि गरीब तबके की विभिन्न योजनाओं के लिए सरकार ने खजाना खोला, लेकिन उद्योग क्षेत्र को कुछ नहीं मिला। एमएसएमई सेक्टर से देश के सबसे बड़े प्रदेश में 90 लाख लोग जुड़े है। छोटी उद्योग इकाइयां देश की जीडीपी में 30 प्रतिशत से अधिक भागीदारी करती हैं। इसके बावजूद एमएसएमई के लिए बजट में कोई नई नीति शामिल नहीं करना समझ से परे हैं। कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, योगी सरकार यूं ही बेवफा नहीं हुई। उम्मीद है कि सरकार अपनी मुश्किलें दूर करके उद्योग क्षेत्र पर आगे ध्यान देगी। -अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
औद्योगिक क्षेत्र मिलने की बजट ने धूमिल कर दी उम्मीद
एमएसएमई की उपेक्षा करके कोई भी सरकार प्रदेश की अर्थ व्यवस्था एक ट्रिलियन डालर तक नहीं पहुंचा सकेगी। लघु औद्योगिक इकाइयों का जितना ज्यादा विकास होगा, उतने ही ज्यादा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश-प्रदेश में खुशहाली आएगी। जिन जनपदों में नए औद्योगिक आस्थान विकसित होने हैं, उनकी सूची में जिले का नाम नहीं होना निराशाजनक रहा। -अभिनव ओमर, जिलाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
पटरी दुकानदारों को राहत के बजाय मिल रही आफत
उम्मीद थी कि कोरोना काल में प्रभावित हुए कारोबार को उठाने के लिए बजट में विशेष उपाय किए जाएंगे, लेकिन बजट में व्यापारियों की कोई मांग पूरी होती नहीं दिखी। फुटपाथों और ठेलों पर सामान बेंचने वाले पटरी दुकानदारों की बेहतरी के लिए कोई प्रावधान करने के बजाय सरकार उन्हें अतिक्रमण के नाम पर उजाड़कर उनका रोजगार छीन रही है। -वेद प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (कंछल गुट)
व्यापारियों की समस्याएं हुईं उपेक्षित
वैचारिक मतभेदों के बावजूद सभी व्यापार संगठन काफी समय से एक सुर से व्यापारी सुरक्षा कोष बनाने, जीएसटी का सरलीकरण करने और कारोबार को आसान बनाने के लिए विभिन्न विभागों से होने वाली अड़चनें दूर करने आदि मांगें कर रहे हैं। बजट में सिर्फ आम आदमी पर फोकस किया गया है।
-कुलदीप सिंह दुआ, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल (मिश्रा गुट)
सरकार बजट सिर्फ जुमला
सरकार का बजट सिर्फ जुमला है। जो घोषणा पत्र में कहा गया था वह इसमें कुछ भी दिखाई नहीं दिया। बिजली फ्री के नाम पर अब मोटर में मीटर लगाने शुरू कर दिए हैं। जब किसानों को बिजली फ्री देनी है तो मीटर क्यों लगवाए जा रहे हैं। इसमें भी आगे कोई न कोई कारण निकलकर सामने आएगा। -मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत गुट शाहजहांपुर
दोगुनी आय का क्या हुआ?
सरकार ने अपने घोषणा पत्र में किसानों के लिए आय दोगुनी करने का जो वायदा किया था वह इस बजट में कुछ नहीं हुआ। आवारा पशुओं से निजात दिलाने का नाम भी नहीं है। किसानों को फ्री बिजली देने का वायदा भी पूरा होता नहीं दिख रहा है। -तरविंदर सिंह मोमी, युवा जिलाध्यक्ष भाकियू चढ़ूनी गुट पुवायां
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