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पौष पूर्णिमा पर पर्व स्नान को ढाई घाट गंगा तट पर उमड़े श्रद्धालु

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ढाईघाट गंगातट पर एक माह के लिए बसने लगा तंबुओं का शहर। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। मिर्जापुर क्षेत्र में ढाई घाट गंगा तट पर चल रहे माघ मेले में पौष पूर्णिमा के पावन पर्व पर हजारों साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ गंगा में डुबकी लगाई। इसी के साथ उन्होंने कल्पवास करने के लिए वहां डेरा डाल दिया है। सोमवार को सुबह हुई कड़ाके की ठंड पर आस्था भारी पड़ती नजर आई। हजारों श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने गंगास्नान के बाद अपने डेरों में लाउडस्पीकर से भजन-कीर्तन करके मेला क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
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पर्व स्नान के मद्देनजर नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी की निकासी होने से शनिवार रात से गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने लगी। इस कारण ढाई घाट का लगभग 500 मीटर क्षेत्र टापू में बदल गया है। कई संतों के डेरे और श्रद्धालुओं के तंबू भी पानी से घिरने के बाद जलमग्न हो गए। जिला पंचायत के मेला बाबू अनिल कुमार द्विवेदी ने बताया कि संतों और श्रद्धालुओं के जलमग्न हुए डेरे-तंबू रात में ही उखड़वाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर लगवा दिया गया। मेले में कड़ाके की ठंड में भी अलाव नहीं जलाए जाने से वृद्ध श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत हो रही है। हालांकि, मेलाबाबू का कहना है कि कि अलाव के लिए ईंधन की व्यवस्था की जा रही है।
यही नहीं, गंगा के जलस्तर में वृद्धि हो जाने से मेला परिसर में स्थापित अग्निशमन यूनिट भी टापू बन गई है। जिला पंचायत के कर्मचारियों के अनुसार गंगा की पहली धारा में पाइप डालकर वहां शीघ्र अस्थायी पुलिया का निर्माण कराया जाएगा। इस व्यवस्था से फायर ब्रिगेड के साथ ही श्रद्धालुओं को गंगा की मुख्य धारा तक आने-जाने में दिक्कत नहीं होगी। इस बीच, मेले में संतों के पंडालों में अस्थायी मंदिरों और हवन-पूजन के लिए यज्ञशालाओं का तेजी से निर्माण कराया जा रहा है। संतों के पंडालों में पौष पूर्णिमा से ही असहाय, बेसहारा संतों और श्रद्धालुओं को चाय पिलाने का क्रम भी शुरू हो गया है।

ढाईघाट में पौष पूर्णिमा पर्व पर गंगास्नान करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

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