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दीप पर्व पर चहुंओर बिखरीं खुशियां

Thu, 12 Nov 2015 11:26 PM IST
शाहजहांपुर।
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ज्योति का महापर्व दीपावली पूरे जिले में धूम-धड़ाके के साथ मनाया गया। छोटी-बड़ी दुकानों, प्रतिष्ठानों, शोरूम से लेकर घर-आंगन तक रंग-बिरंगी और दूधिया रोशनी ने जगमगाते रहे। श्री गणेश-लक्ष्मी का परंपरानुसार पूजन करने के बाद घर के मुखिया ने महिलाओं, युवाओं और बच्चों के साथ घी-तेल के दीपक जलाकर और मोमबत्तियों से जगमगाहट की। बिजली की झालरों ने इस प्रयास को और भी रोमांचक बनाया। नन्हें-नन्हें टिमटिमाते दीपों की लरें देखते ही बनती थीं। घर की मुंडेर से लेकर छतों और गली-कूचों में रोशनी ही रोशनी थी। आतिशबाजी की तड़तड़ाहट और पटाखों की तेज आवाज से दिशाएं आधी रात के बाद तक गूंजती रहीं।
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घरों में शाम सात बजे से ही पूजा की तैयारियां शुरू होने लगी थीं। गणेश-लक्ष्मी का पूजन कर सभी ने अपने से बड़ों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। पूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार पर आकर्षक रंगोली बनाई गई। परिवार समेत लोगों ने लक्ष्मी-गणेश का विधि-विधान से पूजन किया और आरती कर मिष्ठान बांटा। पूजा के बाद पड़ोसियों तथा सगे-संबंधियों के यहां लोगों ने मिठाई तथा खील-खिलौने बांटकर आपसी भाईचारे की भावना का परिचय दिया।
पूजा होते ही बच्चों में आतिशबाजी चलाने की धुन सवार हो गई और उन्होंने घर के सदस्यों के साथ छत पर खूब अतिशबाजी चलाकर त्योहार का आनंद लिया। युवा वर्ग ने जहां, तेज आवाज वाले पटाखों, राकेट आदि से सभी को आकर्षित किया, वहीं बच्चों और महिलाओं ने फुलझड़ी, महताब, हाथ वाली फिरकी आदि का लुत्फ लिया। रंग-बिरंगी रोशनी वाले अनार ने अंधेरा दूर करने का खूब प्रयास किया। साथ ही फिरकी भी खुशी में खूब नाच कर खुशियां मना रही थी।  
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आतिशबाजी से निवृत्त होने के बाद परिवार के सदस्यों ने एक साथ लजीज व्यंजनों और मिष्ठान का आनंद दिया। आतिशबाजी का सिलसिला तो आधीरात के बाद तक चलता रहा।  

महिलाओं ने उपवास रखकर की गोवर्धन पूजा
शाहजहांपुर। दिवाली से पहले ही करवाचौथ से शुरू हुई त्योहारों की लड़ी में एक और गोवर्धन पूजा नामक पर्व बृहस्पतिवार को शामिल हुआ। सुहागिनों ने परंपरागत ढंग से गाय के गोबर से आंगन में गोवर्धन से संबंधित आकृतियां बनाकर उसे मिट्टी के दीया-कुचरिया और नई रुई से सजाया और कथा सुनाकर पूजा अर्चना की।
गोवर्धन पूजा के लिए महिलाओं ने उपवास रखा और गोबर की आकृतियों की खील-खिलौनों और मिष्ठान आदि से पूजा अर्चना कर आरती की। इसके बाद उन्होंने बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर जलपान गृहण किया। दिवाली के दूसरे दिन गोर्वधन पूजा का महत्व है। इसलिए महिलाओं ने उपवास रखकर गाय के गोबर से घर के आंगन में प्रतीक रूप से गोवर्धन की आकृति बनाई और सीकों से उसे आच्छादित कर दीया-कुचरिया से उसे सजाया और सुख-संपन्नता की कामना की।
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