शाहजहांपुर। स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ने के साथ एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) के मरीजों में तेजी से इजाफा हो रहा है। छह महीने में ही 116 मरीज मिले हैं तो केवल जून में 31 मरीजों में एचआईवी की पुष्टि हुई है। तकरीबन 60 प्रतिशत मरीज 20 से 45 वर्ष की आयु के बीच के हैं। ऐसे भी कई रोगी मिले हैं जिनका डेटिंग एप के जरिये अपने पार्टनर से संपर्क हुआ और वे भी संक्रमित हो गए।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में आईसीटीसी (इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर) में एचआईवी मरीजों की जांच, काउंसलिंग और इलाज किया जाता है। सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष दिवाकर ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान सामने आता है कि सबसे ज्यादा मरीज यौन क्रियाओं से एचआईवी संक्रमित होते हैं।
प्ले स्टोर पर कई डेटिंग एप उपलब्ध हैं जिनमें कई ऐसे लोग भी सक्रिय होते हैं जो एचआईवी या अन्य यौन संक्रमित बीमारियों से ग्रसित होते हैं। इनके साथ यौन क्रिया से एचआईवी, हेपेटाइटिस, सिफलिस व अन्य यौनजनित रोग होते हैं। इसके अलावा एक ही सिरिंज के बार-बार इस्तेमाल, टैटू बनवाने के दौरान असावधानी बरतने, संक्रमित रक्त चढ़वाने आदि कारणों से भी लोग एचआईवी संक्रमित होते हैं। (संवाद)
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मौके पर हो रही जांच
गत एक वर्ष में उप्र स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से एचआईवी-सिफलिस जांच का दायरा बढ़ाया गया है। अब शिविर लगाकर काउंसलर मौके पर ही किट के माध्यम से जांच कर रहे हैं। किट से जांच में एचआईवी या सिफलिस पॉजिटिव मिलने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद काउंसलिंग और इलाज मुहैया कराया जाता है।
केस एक
पूर्वांचल का रहने वाला 25 वर्षीय युवक नौकरी के सिलसिले में शाहजहांपुर में रह रहा था। डेटिंग एप के जरिये एक संक्रमित व्यक्ति से मुलाकात हुई। बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर जब जांच कराई तो एचआईवी पॉजिटिव मिला।
केस दो
राजकीय मेडिकल कॉलेज में जांच में एचआईवी पॉजिटिव मिलने पर आईसीटीसी में काउंसलिंग के दौरान 22 वर्षीय एक युवक ने बताया कि दिल्ली में रहकर नौकरी कर रहा था। डेटिंग एप के जरिये वह एक व्यक्ति के संपर्क में आया था।
वर्ष एचआईवी के कुल मरीज पुरुष महिला
2021 38 30 8
2022 38 27 11
2023 59 44 15
2024 77 48 29
2025 139 103 36
2026 116 80 36
वर्तमान में हर मरीज-गर्भवती महिला की एचआईवी जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही वृहद स्तर पर शिविर लगाकर भी जांच की जाती है। इस वजह से मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे भी केस सामने आ रहे हैं जिनमें डेटिंग एप से संपर्क में आकर युवक संक्रमित हुए हैं। इस तरह के मामलों में पार्टनर का पता करना काफी मुश्किल होता है। फिर भी उसे तलाशकर जांच, काउंसलिंग और इलाज किया जाता है।
-डॉ. मनीष दिवाकर, नोडल अधिकारी आईसीटीसी, राजकीय मेडिकल कॉलेज