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साइबर ठगों के आगे बेबस पुलिस.. मंत्री जी के भतीजे से ठगी करने वाले को पकड़ पाएगी!

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शाहजहांपुर। साइबर ठगों के आगे बेबस पुलिस वित्तमंत्री सुरेश खन्ना के भतीजे से फास्ट टैग के जरिये ठगी करने वालों तक पहुंच पाएगी, इस पर संशय बना हुआ है। अगर पुराने आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पुलिस साइबर ठगों के इर्दगिर्द भी पहुंचती नहीं दिखती। हालांकि इन मामलों में पुलिस कई बार दबाव में रिपोर्ट तो दर्ज कर लेती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं करती और ठगी का शिकार हुआ व्यक्ति रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी ठगा ही रह जाता है, जबकि कई मामलों में तो पुलिस पीड़ित को थाने से ही भगा देती है।
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पिछले साल साइबर क्राइम से जुड़े जिले में 78 मामले दर्ज हुए, इनमें से 54 मामले को पुलिस ने निपटारा कर दिया। ये मामले वो थे जो सोशल मीडिया से जुड़े थे, जबकि 24 मामले जो बैंक एकाउंट से ठगी के थे आज भी लंबित पड़े हैं। इसमें पुलिस की कार्रवाई रिपोर्ट दर्ज करने के अलावा एक कदम भी नहीं बढ़ पाई। हालांकि पुलिस मजबूत साइबर तंत्र होने का दावा करती है, लेकिन घटनाओं का खुलासा न होने से उसके सारे दावे बेईमानी लगते हैं। यहीं वजह है कि ज्यादातर बैंक ग्राहक ठगी का शिकार होने के बाद मन मसोसकर रह जाते हैं।
केस-एक
न आरबीआई से मदद मिली और न ही पुलिस कुछ कर पाई
शाहजहांपुर। सदर कोतवाली क्षेत्र में स्थित आवास विकास कॉलोनी-महमंद जलालनगर निवासी कमल कृष्ण सक्सेना का बचत खाता भारतीय स्टेट बैंक शाखा टाउन हाल में है। उसके खाते से 23 जुलाई 2018 की रात पांच बार में एटीएम व स्वीप ट्रांसफर के जरिये 1.60 लाख रुपये हड़प कर लिए गए। बैंक प्रबंधक से संपर्क किया तो बताया गया कि वाराणसी के मोहल्ला लंका में स्थित बैंक में मंजू कुमारी के बचत खाते में रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। मामले की शिकायत बैंक प्रबंधक से लेकर आरबीआई तक की लेकिन नतीजा सिफर रहा। मामले की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस जांच चल रही है, कहकर टरकाती रही। मजबूरन शिकायतकर्ता ने अब उपभोक्ता फोरम कोर्ट की शरण ली है।
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केस-दो
...आखिर मन मसोसकर बैठ गए हेड मास्टर
शाहजहांपुर। शहर के मोहल्ला अजीजगंज न्यू कॉलोनी निवासी रामदयाल ब्लॉक मदनापुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय हेड मास्टर हैं। उनका बैंक खाता नवादा इंदेपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा में है। 31 जुलाई 2018 की शाम छह बजे उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति ने कॉल की और उसने खुद को बैंक प्रबंधक बताते हुए कहा कि तुम्हारा खाते में आधार नंबर अंकित नहीं है और एटीएम से लेन-देन करते हो। मोबाइल पर आधार नंबर बताओ। इस पर टीचर ने आधार नंबर बता दिया। थोड़ी देर बाद मोबाइल पर मैसेज आया कि आपके खाते से 42999 रुपये निकल गए हैं। उन्होंने बैंक में शिकायत की और मामले की रिपोर्ट भी चौक कोतवाली में दर्ज कराई। महीनों दौड़भाग की लेकिन बैंक और पुलिस की ओर से कोई मदद नहीं मिली। लिहाजा मन मसोसकर बैठ गए।
कई बड़ी घटनाओं का खुलासा साइबर सेल की मदद से हुआ है। जो मामले लंबित हैं, उन पर पुलिस काम कर रही है। जल्द ही उनका भी खुलासा होगा।
दिनेश त्रिपाठी, एएसपी सिटी
भोले-भाले लोगों को ऐसे बनाते हैं जालसाजी का शिकार
साइबर जालसाज खुद को बैंक अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। सबसे पहला उनका कहना होता है कि आपका एटीएम कार्ड ब्लॉक हो गया है। नया एटीएम कार्ड बनेगा। इसी के साथ ही वह एटीएम कार्ड में लिखे नंबर और कोड नंबर पूछ लेते हैं। बैंक ग्राहक को ठगी का एहसास तब होता है, जब वह जालसाजी का शिकार हो जाता है। एकाउंट से ऑनलाइन लेनदेन करने वालों का एकाउंट भी जालसाज हैक कर लेते हैं।
बैंकों की कार्य प्रणाली पर खड़े हो रहे सवाल
कहने को तो बैंक नया एकाउंट खोलने में काफी सतर्कता बरतते हैं, लेकिन जब कोई ठगी का शिकार होने के बाद संबंधित बैंक अधिकारी से शिकायत दर्ज कराता है तो उसे फौरी तौर पर इतना तो बता दिया जाता है कि फलां जगह से और फलां एकाउंट में रुपया ट्रांसफर हो गया है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साध ली जाती हैं।
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